How Numerology Can Help You in Daily Life

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How Tarot Card Reading Can Guide and Improve Your Daily Life

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How Tarot Card Reading Can Guide and Improve Your Daily Life

There are moments in life when logic feels incomplete. You may have all the information, all the facts, and yet something inside you still feels uncertain.

How Vastu Shastra Can Improve Your Daily Life

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How Vastu Shastra Can Improve Your Daily Life

In the ancient wisdom traditions of India, the environment in which we live and work is not considered a passive backdrop. Instead, it is viewed as a living field of energy that constantly interacts with our body, mind, and destiny.

How Astrology Can Help You Understand Your Personality and Life Path

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How Astrology Can Help You Understand Your Personality and Life Path

Today, institutions like AIFAS have made it possible to learn this ancient science through well-designed online astrology courses and online astrology classes.

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रोग भगाएं रत्न

रत्न धारण करने से यदि रोगी को बिना दवा खाए असर हो जाए या दवा जल्दी असर दिखा दे तो हर व्यक्ति रत्न धारण करना चाहेगा लेकिन इसके लिए रत्नों के गुण, धर्म और प्रभाव की जानकारी आवश्यक है। रोग भगाने में रत्न किस प्रकार सहायक होते हैं आइए जानें...

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लक्ष्मी कृपा के ज्योतिषीय आधार

दीपावली महापर्व की परंपरा कब से प्रारंभ हुई है यह बताना व जानना प्रायः दुष्कर है इस दीपावली पर्व परंपरा का इतिहास अलग-अलग ढंग से प्राप्त होता है। हमारी भारतीय संस्कृति वेद प्रधान है। वेदों को लेकर पौराणिक साहित्य में ब्रह्म की चर्चा हुई है। ब्रह्म का दूसरा नाम विद्या भी है। शाक्त संप्रदाय में इस ब्रह्म या विद्या की साधना के दस प्रधान मार्ग बताये गये हैं। यही दस मार्ग हैं- काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी एवं कमला। कमला को ही लौकिक जीवन में महालक्ष्मी के नाम से जाना जाता है। पुराणों मंे समुद्र मंथन की कथा का विस्तार से उल्लेख हुआ है। महालक्ष्मी इसी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं।

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लग्न अनुकूल स्वास्थ्यवर्धक भोजन

अंग्रेजी की एक प्रसिद्ध कहावत है जिसके अनुसार एक मनुष्य का भोजन दूसरे के लिए जहर होता है। इस का निरूपण ज्योतिष शास्त्र भली प्रकार करता है। बारह राशियों की प्रकृति और क्षमता भिन्न है, अतः हर व्यक्ति को निरोग रहने के लिए अपने जन्म लग्न के अनुकूल भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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लग्न कुंडली और चलित कुंडली: जानिए कैसे प्राप्त करें अपने जन्म कुंडली से सही भविष्य

जब भविष्यवाणी करने की बात आती है तो भाव चलित कुंडली बहुत महत्वपूर्ण होती है। लोग प्रायः भ्रमित रहते हैं की किस कुंडली का प्रयोग किया जाए क्योंकि कभी कभार दोनों कुंडलियों में ग्रह स्थितियाँ अलग-अलग होती है।

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लग्न राशि: व्यक्तित्व का आईना

आधुनिक युग भाग-दौड़ और व्यस्तता का युग है। बढ़ते शहरीकरण ने दुनिया को छोटा और लोगों को एक-दूसरे से अनजान कर दिया है। वर्षों तक साथ रहने पर भी एक परिवार के लोग एक-दूसरे की पसंद नापसंद को अच्छी तरह से नहीं समझ पाते हैं और एक-दूसरे को नहीं समझ पाने की यह स्थिति कई बार परिवार के बिखराव का कारण बन जाती है।

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लग्नानुसार कालसर्प योग

मेषादि द्वादश राशियों के लग्न में निर्मित होने वाले कालसर्प योगों का विभिन्न रूपों में अलग अलग प्रभाव होता हैं। मेष तथा वृश्चिक लग्न-मंगल की राशि मेष-वृश्चिक लग्न में जन्मकुंडली में कालसर्प निर्मित हो तो मंगल और राहु दोनों से पीड़ा तथा परेशानियां होती हैं।

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लग्नानुसार कालसर्प योग का फलादेश

कालसर्प योग प्रत्येक लग्न में अलग-अलग प्रकार का फल देता है। विभिन्न लग्नों में काल सर्प योग होने पर किस प्रकार के फल मिलते हैं उसका विवेचन लग्नानुसार इस लेख में दिया गया है।

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लग्नानुसार रत्न चयन

भारतीय ज्योतिषशास्त्र के फलित स्कन्ध के विकास के मूल आधार के रूप में महर्षि पराशर के सिद्ध ान्त के योगदान को एकमत से स्वीकार किया गया है। फलित ज्योतिषशास्त्र के प्रत्येक महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त के विषय में महर्षि पराशर के विचारों को विश्वसनीय मार्गदर्शक माना जाता है।

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लग्नानुसार रत्न निर्धारण

रत्नों का ज्योतिष में महत्व अत्यंत प्राचीन है। ग्रहों को अनुकूल बनाने हेतु रत्न धारण किये जाते हैं। ग्रहों के अनुसार रत्न इस प्रकार हैं: ग्रह रत्न सूर्य माणिक्य चंद्र मोती मंगल मंूगा बुध पन्ना गुरु पुखराज शुक्र हीरा शनि नीलम

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लग्नानुसार विदेश यात्रा के प्रमुख योग

जन्मकुंडली के द्वादश भावों में से प्रमुखता, अष्टम भाव, नवम, सप्तम, बारहवां भाव विदेश यात्रा से सम्बंधित है। तृतीय भाव से भी लघु यात्राओं की जानकारी ली जाती है।

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लघुपाराशरी के अनुसार अंतर्दशाफल की मीमांसा

दशाधीश के विरुद्ध फलदायक ग्रहों की अंतर्दशा का फल: लघुपाराशरी के अनुच्छेद 54 के अनुसार अंतर्दशाधीशों को निम्नलिखित आठ वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है। 1. संबंधी-सधर्मी 2. संबंधी-विरुद्धधर्मी 3. संबंधी-उभयधर्मी 4. संबंधी-अनुभयधर्मी 5. असंबंधी-सधर्मी 6. असंबंधी-विरुद्धधर्मी 7. असंबंधी-उभयधर्मी 8. असंबंधी-अनुभयधर्मी

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लड़का होगा या लडकी जानिए स्वर साधना से

शास्त्रानुसार रजोदर्शन के बाद की सोलह रातों में ही गर्भाधान संभव है। इनमें सात रातों को सम एवं छ: रातों को विषम रात्रि कहते है। इसमें प्रथम तीन रातें त्याज्य है। अत: चौथी, छठी, आठवीं, दशवीं, बारहवीं, चौदहवीं और सोलहवीं सम है।