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There are moments in life when logic feels incomplete. You may have all the information, all the facts, and yet something inside you still feels uncertain.
By: AIFAS
23-Mar-2026
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In the ancient wisdom traditions of India, the environment in which we live and work is not considered a passive backdrop. Instead, it is viewed as a living field of energy that constantly interacts with our body, mind, and destiny.
By: Future Point
12-Mar-2026
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Today, institutions like AIFAS have made it possible to learn this ancient science through well-designed online astrology courses and online astrology classes.
24-Feb-2026
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देश के सर्वोच्च पद के चुनाव का समय नजदीक अआया जा रहा है। अटकलों का बाजार गर्म है। चुनाव मैदान में दो सशक्त उम्मीदवार है। श्रीमती प्रतिभा पाटिल तथा वर्तमान उपराष्ट्रपति श्री भैरों सिंह शेखावत। १९ जुलाई को होने वाले स चुनाव में विजयश्री किसे मिलेगी
By: फ्यूचर समाचार
01-Jan-2014
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सर्वप्रथम राहु का उल्लेख सूर्य के प्रसंग में ऋग्वेद में प्राप्त होता है जिसका अर्थ अंधकार है। ऋग्वेद में राहु उस दैत्य का नाम प्रतीत होता है जो सूर्य-चंद्र ग्रहण का कारण बनता है। इसे स्वर्भानु कहा गया है, जो सूर्य के प्रकाश को रोकता है।
By: राजेंद्र शर्मा ‘राजेश्वर’
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राहु १४ जनवरी २०१३ को सायंकाल ७:१८ बजे तुला राशि में प्रवेश कर चुके हैं। दृष्टव्य है की शनि पहले से ही तुला राशि में गोचर कर रहे हैं। इस प्रकार राहु व् शनि की युति विषयोग का निर्माण कर रही हैं।
By: मनोज कुमार शुक्ला
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कुंडली में राहु-केतु की स्थिति पर ही काल सर्प योग के शुभाशुभ परिणाम निर्भर करते हैं। जिस भाव में रहकर राहु-केतु काल सर्प योग बनाते हैं उस भाव विशेष से जुड़े फल अधिक मिलते हैं, कैसे आइए जानें ...
By: फ्यूचर पाॅइन्ट
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काल सर्प योग दोष निवारण ३९ कुंडली के विविध भावानुसार बारह प्रकार के काल सर्प योग बनते हैं। इनकी समयानुसार शांति अवश्य कराई जानी चाहिए। ग्रहों के दोष शमनार्थ उपाय करने के पूर्व ज्योतिषीय परामर्श लेना नितांत आवश्यक रहता है।
By: बसंत कुमार सोनी
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मानव के शरीर पर उसके व्यक्तित्व पर और उसके जीवन पर ग्रहों का पूरा असर पडता है। प्राचीन ऋषि महारिशियों ने केवल सात ग्रहों की परिकल्पना की है, उन्होंने राहू और केतु को ग्रह नहीं मानकर छाया गृह की संज्ञा दी है। इस वाक्य को समझने के लिए हमें निम्न पंक्तियों
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राहु-केतु छाया ग्रह है, परन्तु उनके मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव के आधार पर हमारे तत्ववेता ऋषि-मुनियों ने उन्हें नैसर्गिक पापी ग्रह की संज्ञा दी है।
By: सीताराम सिंह
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14 जुलाई 2014 को राहु राशि परिवर्तन कर रहा है। तुला से कन्या में आ जाएगा और 18 महीने की अवधि तक इसी राशि में रहेगा। जिनकी कुंडलियों में राहु 3, 6, 11 भावों में, उच्च राशि, मूल त्रिकोण राशि, स्वराशि या मित्र राशि में है उनको राहु के शुभ फल प्राप्त होंगे यदि साथ में दशा भी अनुकूल हो। प्रतिकूल परिस्थितियों में राहु के अशुभ फल प्राप्त हो सकते हैं।
By: सोनियां शर्मा
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ब्रह्मांड में स्थित नव-ग्रहों में से प्रमुख सात ग्रहों (सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, तथा शनि) को छोड़कर शेष दो छाया ग्रहों (राहु-केतु) में राहु का विशेष स्थान है। हालांकि इन छाया ग्रहों का कहीं भौतिक अस्तित्व नहीं है केवल आभास मात्र है लेकिन अन्य प्रमुख ग्रहों की भांति इनका भी भूतल निवासी मानवों पर सीधा प्रभाव दृष्टिगोचर होता है, जिसके कारण राहु नामक छाया ग्रह भी ज्योतिष जगत में अपना विशेष स्थान रखता है।
By: सुरेंद्र कुमार शर्मा
15-May-2015
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राहू ५ मई २००८ जी सायं ८ बजकर ४ मिनट पर कुंभ राशि में मकर राशि में प्रवेश कर जायेगें। साथ ही केतु, जो अभी शनि के साथ सिंह राशि में गोचर कर रहे है, भी शनि से पृथक होकर कर्क राशि में प्रवेश कर जायेंगे। मध्य राहू पांच दिन पूर्व ही।
By: डॉ. अरुण बंसल
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राहू मूलत: छाया ग्रह है, फिर भी उसे एक पूर्ण ग्रह के समान ही माना जाता है। यह आर्द्रा, स्वाति एवं शतभिषा नक्षत्र का स्वामी है। राहू कि दृष्टि कुंडली के पंचम, सप्तम और नवम भाव पर पड़ती है। जिन भावों पर राहू कि दृष्टि का प्रभाव पडता है, वे राहू कि महादशा।
By: अशोक शर्मा
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ज्योतिष शास्त्र में सात मुख्य ग्रहों और दो छाया ग्रहों को सर्वसम्मति से मान्यता प्राप्त है। राहु केतु छाया ग्रह हैं। छाया ग्रह होते हुये भी राहु की फलादेश में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। कोई भी ग्रह जब कुंडली में राहु के साथ युति बनाता है तो उसके फल कुछ और ही होते हैं। कई स्थानों पर ये युति अशुभ न होकर शुभ फल प्रदान करती है और अनेक अन्य भावों में अशुभत्व प्रदान करती है।
By: रश्मि चैधरी