How Numerology Can Help You in Daily Life

How Numerology Can Help You in Daily Life

How Tarot Card Reading Can Guide and Improve Your Daily Life

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How Tarot Card Reading Can Guide and Improve Your Daily Life

There are moments in life when logic feels incomplete. You may have all the information, all the facts, and yet something inside you still feels uncertain.

How Vastu Shastra Can Improve Your Daily Life

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How Vastu Shastra Can Improve Your Daily Life

In the ancient wisdom traditions of India, the environment in which we live and work is not considered a passive backdrop. Instead, it is viewed as a living field of energy that constantly interacts with our body, mind, and destiny.

How Astrology Can Help You Understand Your Personality and Life Path

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How Astrology Can Help You Understand Your Personality and Life Path

Today, institutions like AIFAS have made it possible to learn this ancient science through well-designed online astrology courses and online astrology classes.

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रक्त चाप

रक्त का संचार होने से जो दबाव रक्त कोशिकाओं पर पड़ता है वही रक्त चाप कहलाता है। रक्त शरीर के पोषक घटकों को सूक्ष्म कोषों तक पहुंचाता है। किंतु रक्त को वहन करने में हृदय और रक्तवाही संस्थान मुख्य भूमिका निभाते हैं। इन दोनों के अलावा एक और घटक है रक्तचाप। रक्त एक निश्चित दबाव से बहता है। हृदय का बायां भाग तेज संकुचित होकर रक्त को महाधमनी में धकेलता है और रक्त वाहिनियों से होकर आगे गतिमान होता है। इसे संकोच कालीन रक्त भार कहते हैं।

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रेकी और प्राणिक हीलिंग में क्या अंतर है?

रेकी चिकित्सा पद्धति में रेकी मास्टर रोगग्रस्त व्यक्ति के शरीर का अपने हाथ से स्पर्श कर इलाज करता है। इसमें रोगग्रस्त व्यक्ति का स्पर्श आवश्यक होता है। इसमें प्राण ऊर्जा को वह व्यक्ति जिसने रेकी सीखी हो चारों ओर फैले हुए वायुमंडल या वातावरण से प्राप्त करके अपने सहस्रार चक्र, आज्ञा चक्र एवं हृदय चक्र से ले जाते हुए अपनी हथेली के माध्यम से अन्य व्यक्ति या रोगी का स्पर्श कर उसके शरीर में प्रवाहित कर देता है। जिसे रेकी दी जाती है वह रोगग्रस्त व्यक्ति ऐसी प्राण ऊर्जा को अपनी ग्रहण शक्ति के अनुरूप प्राप्त कर लेता है।

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रेखा एवं योग

जिस तरह साहित्य समाज का दर्पण है उसी तरह मनुष्य का हाथ उसके जीवन का दर्पण होता है। हाथ की रेखाओं पर्वतों आदि में उसके जीवन का सारा रहस्य छिपा होता है। इन रेखाओं का फल कथन ज्योतिष के विभिन्न योगों के आधार पर भी किया जाता है

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रंगों की रंगीन दुनिया आपके व्यक्तित्व का दीया

सफेद रंग नव रंग नवग्रह ज्योतिर्विज्ञान शास्त्र में जिसे सफेद रंग पसंद आता है उसका स्वभाव चंद्रमा ग्रह की विशेषता लिए होता है अर्थात् वो सौम्य, सरल, स्पष्टवादी, सादगी पसंद और आदर्शवादी प्रकृति से परिपूर्ण होते हैं।

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रूचिका क्या करे...

रूचिका और रवीश की सुंदर जोड़ी हर पार्टी की जान होती थी। जहां सभी उनकी एक ओर प्रशंसा करते नहीं थकते थे वहीं मन ही मन ईष्र्या भी करते थे कि कैसे ये दोनों आपस में इतना तालमेल रख पाते हैं और सोसायटी के हर फंक्शन में अपनी धाक जमा लेते हैं

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रजनीकांत

एक साधारण परिवार में बिन मां के बच्चे को जीवन में जितने संघर्ष करने पड़ते हैं शिवाजी राव गायकवाड यानी रजनीकांत ने उन सबका सामना किया। बचपन से ही रजनीकांत को अभिनय का शौक था। कठिन से कठिन दौर में भी अपने जज्बे को बरकरार रखते हुए उन्होंने रंगमंच पर कई नाटक खेले। कुली, कारपेंटर, बस कंडक्टर और फिर सुपर स्टार के रूप में रजनीकांत के चमत्कारिक सफर को जानते हैं

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रत्न

हर मनुष्य की जन्मपत्री में कोई न कोई ग्रह कमजोर और कुछ ग्रह बली होते हैं और इनके अनुसार ही जातक के भाग्य में परिवर्तन आता रहता है।

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रत्न एवं स्वास्थ्य

औषधि मणि मंत्राणां-ग्रह नक्षत्र तारिका। भाग्य काले भवेत्सिद्धिः अभाग्यं निष्फलं भवेत्।। अर्थात- औषधि, रत्न एवं मंत्र ग्रह जनित रोगों को दूर करते हैं। यदि समय सही है तो इनसे उपयुक्त फल प्राप्त होते हैं। लेकिन विपरीत समय में ये भी निष्फल हो जाते हैं। रत्न प्रकृति द्वारा प्रदत्त एक मूल्यवान निधि है। रत्न शब्द का प्रथम प्रमाण ऋग्वेद के श्लोक में मिलता है। रत्न न केवल सौन्दर्य का प्रतीक है वरन यह चिकित्सा पद्धति का भी अंग है। इसका उल्लेख आयुर्वेद की प्रसिद्ध पुस्तक चरक संहिता में हुआ है। आयुर्वेद के अनुसार रोगनाश करने की जितनी क्षमता औषधि सेवन में है उसी के समान रत्न धारण करने में भी है। आचार्य दण्डी रत्न की विशेषता बताते हुए कहते हंै-

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रत्न क्यों, कब, कैसे और कौनसा पहनें

रत्नों की उत्पति समुद्र मंथन से जुडी हुई है. रत्नों की महता ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के उपचार के लिए विशेष रूप मने कहीं गयी है. रत्न कैसे काम करते है. क्या कोई उपरत्न या शीशे का रंगीन टुकड़ा रत्न का काम नहीं कर सकता

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रत्न चयन व् धारण विधि -विधान

सही रत्न का चुनाव करना एक कठिन कार्य है, क्योंकि रत्न जहां लाभ करते हैं. वहीँ हानि भी पहुंचा सकते हैं. लग्न, चतुर्थ, पंचम, नवम, दशम, द्वितीय ये शुभ भाव हैं. यदि इनसे सम्बंधित ग्रह जन्मकुंडली में स्वग्रही

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रत्न चिकित्सा: निजी अनुभव

विश्व में अनेक चिकित्सा पद्धतियां प्रचलित हैं। रत्न चिकित्सा भी एक सरल व प्रभावी पद्धति है। इसकी मुख्यतः दो विधियां हैं:

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रत्न जिज्ञासा समाधान

मुख्य रत्न नौ ही क्यों है जबकि अनेक प्रकार के और रत्न भी उपलब्ध है? ब्रहमांड में नौ ग्रह जिनका महत्वपूर्ण प्रभाव जातक पर पडता है। इन ग्रहों से निकली रश्मियों को एकत्रित करने की क्षमता नवरत्नों में पाई जाती है, अत: ये रत्न ही प्रमुख रत्न हुए। अन्य रत्न अल्पमात्रा में