How Numerology Can Help You in Daily Life

How Numerology Can Help You in Daily Life

How Tarot Card Reading Can Guide and Improve Your Daily Life

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How Tarot Card Reading Can Guide and Improve Your Daily Life

There are moments in life when logic feels incomplete. You may have all the information, all the facts, and yet something inside you still feels uncertain.

How Vastu Shastra Can Improve Your Daily Life

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How Vastu Shastra Can Improve Your Daily Life

In the ancient wisdom traditions of India, the environment in which we live and work is not considered a passive backdrop. Instead, it is viewed as a living field of energy that constantly interacts with our body, mind, and destiny.

How Astrology Can Help You Understand Your Personality and Life Path

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How Astrology Can Help You Understand Your Personality and Life Path

Today, institutions like AIFAS have made it possible to learn this ancient science through well-designed online astrology courses and online astrology classes.

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महानायक की दुर्घटना

प्रत्येक मनुष्य का जन्म या तो दिन अथवा रात्रि, कृष्ण पक्ष अथवा शुक्ल पक्ष एवं सप्ताह के किसी एक वार को होता है। पंच पक्षी पांच तात्त्विक स्पंदन के आधार पर पांच तरीके से शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष में चंद्र के बढ़ते एवं घटते कलाओं के प्रभाव के अनुरूप कार्य करते हैं। इन पांचों तत्वों का स्पंदन 5 स्तरों में एक निश्चित समयावधि के लिए क्रियाशील रहता है। पक्षियों की क्रियाविधि एवं क्रियाशीलता में पक्ष, तिथि एवं दिवस के आधार पर परिवर्तन आता रहता है। यदि इनमें से कोई एक अपनी उच्च अवस्था में होता है तो दूसरे चार अन्य भिन्न अवस्थाओं में घटते हुए क्रम में होते हैं। हममें से प्रत्येक किसी एक पक्षी के प्रभाव में रहते हैं।

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महापर्व नवरात्र: पूजन विधि

श्रीमद् देवी भागवत आदि पुराणों एवं नाना शास्त्रों में भगवती की उपासना के लिए ‘नवरात्रों’ के महत्व का वर्णन किया गया है। एक सम्वत्सर (वर्ष) में चार नवरात्र होते हैं ...

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महामृत्युंजय मंत्र उपासना

महाम्रत्युन्जय मंत्र के विभिन्न स्वरूपों का उल्लेख हमारे प्राचीन धर्मग्रंथों में मिलता है. इन सबका अपना-अपना महत्व हैं, विशेष स्थिति में इनका विशेष प्रकार से अनुष्ठान किया जाता हैं.

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महिलाएं एवं आभूषण

मुख्यतया सभी महिलाओं को सजने संवरने का शौक होता है और जब बात आभूषण की आए तो यह रूचि और भी बढ़ जाती है। किसी को पारंपरिक डिजाइन ही अच्छे लगते हैं तो कोई किसी ठवसक च्पमबम या नवीनतम डिजाइन की तलाश में लगी रहती हैं। किसी को सिर्फ सोने के बने आभूषण ही लुभाते हैं तो कोई काॅस्ट्यूम ज्वैलरी को अपनाने में हिचकते नहीं। इनमें रत्नों का विशेष महत्व आ जाता है। किसी को रूबी रत्न भाता है तो किसी को डायमंड अधिक पसंद आता है।

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माइनर अरकाना - क्वीन ऑफ़ कप्स

टैरो रीडिंग के दौरान जिस व्यक्ति के लिये उक्त कार्ड प्रगट होता है उस व्यक्ति के लिये यह इंगित करता है कि संबंधित व्यक्ति अगर समस्याग्रस्त है तो प्रतिकूल परिस्थितियों को अपने अनुकूल स्थिति में लाने में सफलता हासिल कर सकता है।

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माइनर अरकाना - फोर ऑफ़ कप्स

टैरो रीडिंग में टैरो डेक के सूट्स ऑफ़ कप्स के कार्ड ‘फोर ऑफ़ कप्स’ का टैरो रीडिंग में उक्त कार्ड का प्रगटन होता है उसका रिप्रेसेन्टेटिव व्यक्ति उस समय कुछ निराश तथा अवसाद ग्रस्त होता है।

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मांगलिक दोष विचार

1. शास्त्रों में उल्लेख संक्षिप्त नारद पुराण के पूर्व भाग, द्वितीय पाद, श्लोक 435-438 में विवाह के इक्कीस दोष बताये गये हैं। इनमें से छठा दोष है “भौम महादोष” अर्थात मंगल का लग्न से अष्टम भाव में होना। श्लोक 435-438 में कहा गया है कि यदि मंगल उच्च का हो एवं तीन शुभ ग्रह लग्न में हों तो इस लग्न का त्याग नहीं करना चाहिये (अर्थात, ऐसी स्थिति में अष्टम मंगल का दोष खत्म हो जाता है)। गौर करें कि हमारे पुराण ने ही परिहार का रास्ता भी दिखाया है।

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मांगलिक योग: दांपत्य जीवन में दोष एवं निवारण

जिस जातक की जन्मकुंडली में मंगल चतुर्थ, सप्तम, अष्टम, द्वादश भावों में स्थित होता है, उसे मांगलिक कहा जाता है। उपरोक्त भावों के अलावा द्वितीय भाव में मंगल की स्थिति को भी मंगली दोष मानते हैं। अर्थात यदि वर की जन्मकुंडली के उपयुक्त भावों में से किसी भाव में मंगल हो तो वर या वधू के जीवन को खतरा हो सकता है।

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माता-पिता और संतान की शिक्षा का आपसी संबंध

हस्तरेखायें एक दर्पण की भांति हैं जो हमें भावी जीवन के साथ-साथ वर्तमान की भी तस्वीर दिखलाती हैं। संतान का जो अपना भाग्य होता है वह तो उसके जीवन में प्रभाव डालता ही है, उसके माता-पिता के हाथ से भी यह स्पष्ट होता है। उनका भी प्रभाव संतान पर पड़ता है। माता-पिता के हाथ से यह पता चलता है कि उनकी संतान कैसी होगी, उनकी सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक आदि स्थिति कैसी रहेगी। यह सब तो हम अविवाहित युवक युवतियों के हाथ से भी देख सकते हैं कि उनकी आने वाली संतान पर उनका क्या प्रभाव होगा।।

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माता-पिता के हाथ और संतान का स्वास्थ्य

यदि किसी व्यक्ति की जीवन रेखा सीधी हो, भाग्य रेखा पर द्वीप हो, और उसकी पहली संतान कन्या हो, तो उसका स्वास्थ्य ठीक रहता है। किन्तु यदि पहली संतान पुत्र हो, तो वह अल्पायु होता है या उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता।

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मानबी बंधोपाध्याय ने रचा इतिहास

‘‘जमाने ने बनाई थी जो दायरे की दीवार मन के अरमानों ने कर दिया उसे दरकिनार यह जनून था या थी खुद से बेपनाह मोहब्बत कि पा ही लिया वो जिसकी की थी शिद्दत से चाहत’’ अपने जीवन में हर व्यक्ति वही करना चाहता है जो उसे अच्छा लगता है

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मानव जीवन में ज्योतिष शास्त्र की सार्थकता

ज्योतिष शास्त्र का मानव जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। ईश्वर ने प्रत्येक मानव की आयु की रचना उसके पूर्व जन्म के कर्मों के अनुसार की है, जिसे कोई भी नहीं बदल सकता विशेषरूप से मनुष्य के जीवन की निम्नांकित तीन घटनाओं को कोई नहीं बदल सकता: 1. जन्म 2. विवाह 3. मृत्यु।