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There are moments in life when logic feels incomplete. You may have all the information, all the facts, and yet something inside you still feels uncertain.
By: AIFAS
23-Mar-2026
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In the ancient wisdom traditions of India, the environment in which we live and work is not considered a passive backdrop. Instead, it is viewed as a living field of energy that constantly interacts with our body, mind, and destiny.
By: Future Point
12-Mar-2026
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Today, institutions like AIFAS have made it possible to learn this ancient science through well-designed online astrology courses and online astrology classes.
24-Feb-2026
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वैदिक ज्योतिष में मेडिकल ज्योतिष का अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। इसके द्वारा व्यक्ति की जन्म कुंडली से उसके स्वास्थ्य का आकलन बेहतर तरीके से किया जा सकता है। कई बार चिकित्सक जातक की बीमारी को ढूंढ़ ही नहीं पाते हैं। ऐसे में एक कुशल ज्योतिषी जन्मकुंडली का भली-भांति निरीक्षण करके बीमारी का अंदाजा लगा सकता है कि शरीर के किस भाग में पीड़ा नजर आती है, आज के इस लेख के माध्यम से हम मधुमेह के संबंध में बात करेंगे कि जन्मकुंडली के वे कौन से योग हैं जिनके आधार पर यह कहा जा सकता है कि व्यक्ति को मधुमेह की बीमारी हो सकती है।
By: राजेंद्र शर्मा ‘राजेश्वर’
15-Jun-2017
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हमारी पाचन क्रिया भोजन को शर्करा (ग्लूकोज) और शरीर के स्वास्थ्य के लिए विभिन्न आवश्यक तत्वों में परिणत करता है। ‘पैंक्रियाज’ ग्रंथि द्वारा स्रावित ‘इन्सुलिन नामक हार्माेन इस शर्करा को शरीर की कोशिकाओं तक रक्त संचार द्वारा पहुंचा कर उन्हें शक्ति प्रदान करता है तथा रक्त में शर्करा की मात्रा नियंत्रित रखता है। खाली पेट शर्करा का स्तर 60 से 100 मिलीग्राम प्रति 100 सी. सी. तथा भोजन के दो घंटे बाद इसका स्तर 100 से 140 मिलीग्राम के बीच रहना चाहिए।
By: सीताराम सिंह
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‘स्थूल प्रमेही बलवानहि एकः कृक्षरतथेव परिदुर्वलक्ष्य। संवृहणंतम कृशस्य कार्यम् संशोधन दोष बलाधिकस्य।। चरक के अनुसार मधुमेह रोग दो प्रकार का होता है- एक तगडे़ और बलवान लोगों पर असर करता है और दूसरे तरह वाली बीमारी से पतले एवं कमजोर लोग प्रभावित होते हैं।
By: जय इंदर मलिक
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अक्सर देखने में आता है कि माता-पिता अपने बच्चों के विवाह के समय अपनी जात-पांत, अपने खानदान, रहन-सहन के स्तर आदि पर बहुत जोर देते हैं और उनकी कोशिश यही होती है कि उनका दामाद या उनकी बहू अपनी ही जाति से हो ताकि उनके रीति रिवाज, खान-पान, रहन-सहन आदि में समानता हो
By: आभा बंसल
01-Jan-2014
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आज हमारी चर्चा का विषय है पांच बार की विश्व चैंपियन, ओलंपिक और एशियाई खेलों की पदक विजेता लौह महिला, महिला बाॅक्सिंग को नई पहचान देने वाली मंगते चुंगनईजंग मैरीकाॅम
By: शरद त्रिपाठी
15-Nov-2015
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वात्सल्य और ममता की मूर्ति मां का नाम सुनते ही मन में हिलोरे स्वतः ही उठने लगती है। मेरी मां भी सहज मातृभाव से परिपूर्ण थी। उनके बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की थी।
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प्रश्न: मलमास एवं क्षयमास क्या होते हैं? ऐसे मास कब-कब आते हैं और इनमें क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए?
By: फ्यूचर पाॅइन्ट
15-Mar-2015
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शुक्र की महादशा मेष लग्न में शुक्र धन भाव का स्वामी होता है और जन्म कुंडली में किस भाव में स्थित है उसका भी विशेष महत्व है। जब भी शुक्र की दशा आयेगी धन योग का फल मिलेगा लेकिन दशा के अनुसार ही शुभ-अशुभ फल प्राप्त होगा। लग्न में शुक्र मेष लग्न में शुक्र लग्न में ही हो तो इस महादशा में धन और सुख का नाश होता है। वह सदा भ्रमणकारी होता है, व्यसनी और चंचल स्वभाव का होता है।
By: अमित कुमार राम
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शारीरिक एवं मानसिक विकलांगता, लकवा तथा दर्दनाक मौत का कारण बनने वाला मस्तिष्क रक्तस्राव ‘ब्रेन हैमरेज’ के प्रकोप में आजकल तेजी से वृद्धि हो रही है। कभी इसका शिकार अधिक आयु वाले होते थे लेकिन अब कम आयु वाले भी इसका शिकार बन रहे हैं।
By: अविनाश सिंह
15-Jan-2017
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मस्तिष्क रक्तस्राव जिसे ब्रेन हेमरेज के नाम से भी जाना जाता है जो एक जानलेवा बीमारी है। बारह राशियों में ब्रेन हेमरेज के कारणों का ज्योतिषीय दृष्टिकोण।
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सि तंबर माह का प्रारंभ भगवान श्रीकृष्ण के जन्म दिवस से हो रहा है तथा इसी माह लगभग 10 तारीख को मुस्लिम समुदाय का सबसे बड़ा त्यौहार ईद-उल-फितर भी पड़ेगा।
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गीता की महत्वाकांक्षा ने उसके वैवाहिक जीवन में उथल-पुथल मचा दी। अपनी इसी महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए उसने पहले पति को छोड़कर दूसरा विवाह किया और मानसिक रूप से बेचैन रहने लगी। आखिर ऐसा क्यों हुआ? उसके दूसरे विवाह के पीछे कौन से ज्योतिषीय कारण थे? आइए जानें...