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There are moments in life when logic feels incomplete. You may have all the information, all the facts, and yet something inside you still feels uncertain.
By: AIFAS
23-Mar-2026
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In the ancient wisdom traditions of India, the environment in which we live and work is not considered a passive backdrop. Instead, it is viewed as a living field of energy that constantly interacts with our body, mind, and destiny.
By: Future Point
12-Mar-2026
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Today, institutions like AIFAS have made it possible to learn this ancient science through well-designed online astrology courses and online astrology classes.
24-Feb-2026
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प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सफलता बहुत ही अनिवार्य है। इस तेजी से बदलते हुए संसार में अपने को उसके अनुकूल ढालना आवश्यक है। सफलता उसी को हासिल होती है, जो आमतौर पर अलग सोच रखता है।
By: एन. राजगोपाल
15-Jan-2017
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वर्ष 2011 किन परिवर्तनों को साथ लेकर चलेगा आइए जानें विशेष रूप से स्वतंत्र भारत के इस वर्ष के भविष्य को ज्योतिष के आइने में
By: अजय भाम्बी
01-Jan-2014
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नव संवत्सर 2068 में भारतीय राजनैतिक दल व शीर्ष नेताओं का भिवष्य कैसा रहेगा जानिए इस लेख द्वारा
By: अजय कुमार
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जन्मकुंडली में सात ग्रहों के साथ दो छाया ग्रह राहु एवं केतु को भी उनके गोचर के अनुसार स्थापित किया जाता है। वैदिक युग में राहु ग्रह नहीं था, बल्कि एक राक्षस था। पौराणिक युग में उस राक्षस के दो भाग हो गये।
By: नरेंद्रमल सुराना
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प्रश्न: राजनीति में सफलता प्राप्त करने के लिए ज्योतिष, अंकशास्त्र व हस्तरेखा शास्त्र में क्या-क्या योग हैं, विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
By: फ्यूचर पाॅइन्ट
15-Jan-2016
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‘‘होनहार बिरवान के होत चिकने पात’’ अर्थात देश काल व परिस्थितियों से जन्म लेते हैं- जनप्रिय राजनीतिज्ञ राजनेता। यही कारण हैं राजनीतिज्ञ बनने के। प्रजातांत्रिक समाज में लोगों की आम समस्याओं एवं उनके समाधान तथा जनहित के विकास कार्यों को शासन से आर्थिक पैकेज दिलाकर अधिकारियों के माध्यम से हल कराने का उरदायित्व चयनित राजनेता का होता है।
By: ओम प्रकाश दार्शनिक
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उच्च कोटि के राजयोग जहां फलित होते देखे गए हैं, वहीं दूसरी ओर इन्हीं राजयोगों का भंग होना भी फलीभूत हुआ है। ऐसा क्यों होता है, आइए कुछ कुंडलियों के माध्यम से इस विषय की तह तक पहुंचने का प्रयास करें।
By: आचार्य किशोर
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पदोन्नति, स्थानांतरण, निलंबन और सेवा समाप्ति जैसी चिन्ताएं सभी कर्मचारियों को परेषान करती हैं लेकिन राज्य कर्मचारियों के मामले में ऐसी स्थितियों के लिए जो ज्योतिषीय योग उतरदायी होते हैं उनके बारे में इस लेख में प्रकाष डाला गया है।
By: लक्ष्मीनारायण शर्मा
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फलदीपिका ग्रंथ के अनुसार:- दुःस्थानभष्टमरिपु व्ययभावभाहुः सुस्थानमन्य भवन शुभदं प्रदिष्टम्। (अ. 1.17) अर्थात् ‘‘जन्मकुण्डली के 6,8,12 भावों को दुष्टस्थान और अन्य भावों को सुस्थान कहते हैं।’’ अन्य भावों में केन्द्र (1,4,7,10) तथा त्रिकोण (5,9) भाव विशेष षुभकारी माने गये हैं। इन भावों मे ंस्थित राषियों के स्वामी ग्रह जातक को जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। इन षुभ भावों के स्वामियों की षुभ भावों में युति अथवा सम्बन्ध होने पर ‘राजयोग’ का निर्माण होता है, जिसके फलस्वरूप व्यक्ति अपने पुरूषार्थ द्वारा प्रगति और सुख-समृद्धि का उपभोग कर संतोष प्राप्त करता है।
By: सीताराम सिंह
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एक मुखी रुद्राक्ष: इस रुद्राक्ष को कोई भी व्यक्ति धारण कर सकता है यह साक्षात् भगवान शिव का स्वरूप माना गया है। इसे धारण करने से यश, मान, प्रतिष्ठा, धन, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
By: रमेश शास्त्री
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वर्तमान समय में शुद्ध एवं दोषमुक्त रत्न बहुत कीमती हो चले हैं, जिससे वे जनसाधारण की पहुंच से बाहर है। अतः विकल्प के रूप में रूद्राक्ष धारण एक सरल एवं सस्ता उपाय है। ग्रह राशि नक्षत्र के अनुसार रूद्राक्ष धारण का संक्षिप्त विवरण यहां प्रस्तुत है।
By: नवीन चित्तलांगिया
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नक्षत्रों की भांति प्रत्येक राशि के भी चार चरण निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक राशि के चरणों में वास्तु का विचार एवं वास्तु के भविष्य का फलकथन किस प्रकार से किया जाए? आइए जानें-
By: महेश चंद्र भट्ट