View:83
There are moments in life when logic feels incomplete. You may have all the information, all the facts, and yet something inside you still feels uncertain.
By: AIFAS
23-Mar-2026
View:150
In the ancient wisdom traditions of India, the environment in which we live and work is not considered a passive backdrop. Instead, it is viewed as a living field of energy that constantly interacts with our body, mind, and destiny.
By: Future Point
12-Mar-2026
View:220
Today, institutions like AIFAS have made it possible to learn this ancient science through well-designed online astrology courses and online astrology classes.
24-Feb-2026
View:24858
स्त्रीय विधि के अनुसार ग्रहों की शांति के लिए जो रत्न या लाॅकेट धारण किए जाते हैं, उनका धारण करने से पूर्व शुद्धिकरण एवं प्राण-प्रतिष्ठा करना आवश्यक माना गया है। इससे धारणकर्ता को शीघ्र मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। यहां रत्न या लाॅकेट को शुद्ध करने एवं उनकी प्राण-प्रतिष्ठा की सरल विधि दी जा रही है।
By: फ्यूचर पाॅइन्ट
01-Jan-2014
View:9073
ज्योतिष में रत्नों की विशेष महिमा है। महर्षियों ने इन रत्नों के उन गुणों को पहचाना जिनसे ये ग्रहों से निकलने वाली रश्मियों को अवशोषित कर लेते हैं और इन्हें धारण करने वाले पर किसी ग्रह विशेष के पड़ने वाले दुष्प्रभावों में कमी आती है और अच्छे प्रभावों में वृद्धि होती है।
By: डॉ. अरुण बंसल
View:8494
रत्न विज्ञान में प्रत्येक रत्न के धारण करने के लिए एक निश्चित माप तय किया गया है। अतः निश्चित माप का रत्न धारण करना ही लाभप्रद होता है उससे कम या अधिक का नहीं। रत्नों का नकारात्मक प्रभाव भी होता है।
By: फ्यूचर समाचार
07-Jun-2021
View:6639
हमारी भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति में प्राचीन काल से ही रत्न धारण की परंपरा रही है। नाना प्रकार के कार्यों की सिद्धि के लिए रत्न-उपरत्न धारण करने से लाभ प्राप्त होता है।
By: रमेश शास्त्री
View:5918
यह सर्वविदित है कि रत्नों में दैवीय शक्ति का वास होता है। इन रत्नों का यदि उचित उपयोग किया जाए तो अनेक रोगों, कष्टों, बाधाओं आदि से रक्षा हो सकती है। यहां विभिन्न रत्नों और उनके प्रभावों का विश्लेषण प्रस्तुत है।
View:7547
रत्नों का प्रयोग हजारों साल से होता आ रहा है। ग्रहों के दोष निवारण में इनकी भूमिका असंदिग्ध है। आज विश्व के चप्पे-चप्पे में लोग इससे परिचित हो गये हैं कि रत्नों से ग्रह-दोषों का शमन होता है, परिस्थितियां अनुकूल हो जाती हंै।
By: हरिश्चंद्र प्रसाद आर्य
15-Jul-2016
View:5345
प्रश्न: रुद्राक्ष कहां पाए जाते हैं? इनकी कितनी किस्में होती हैं? असली एवं नकली रुद्राक्ष की क्या पहचान है?
View:16546
पागल कुत्ते, या अन्य जानवरों के काटने से उत्पन्न भयंकर रोग रेबीज़ कहलाता है। यह एक जानलेवा रोग है, जिसका उपचार केवल बचाव है।
View:13914
रमल विद्या में भी बारह भावों-तन धन, बंधु –बांधव, मां, पुत्र, विद्या, शत्रु, मामा, जाया, मृत्यु, कर्म लाभ फलादेश चमत्कारिक ढंग से किया जाता है। रमल रहस्य पुस्तक के अनुसार पार्वती के द्वारा प्रश्न विद्या के ज्ञान के बारे में सवाल किए जाने पर भगवान शिव
View:23122
रमल ज्योतिष भारतीय मूल का शास्त्र है। इस शास्त्र का प्रसार यवन मौलिवयों ने किया इसिलए इसे यवनीय ज्योतिष भी कहा जाता है। इस शास्त्र में संबिंधत जानकारी प्रस्तुत लेख द्वारा ज्ञात कीजिए।
By: चन्द्रकान्त जी. शेवाले
View:11873
भविष्य कथन कि विभिन्न पद्वतियों में से “रमल” एक बहुत पुरातन पद्वति है, जिसका कभी बहुत चलन था लेकिन वर्तमान काल में यह पद्वति लुप्त सी हो रही है। फिर भी कुछ लोग हैं जो इस “रमल” पद्वति के रहस्यों को भलीं भांति समझते है और उसे प्रयोग में लाते है।
View:13256
विद्या की देवी सरस्वती की कृपा जिस पर होती है उसकी ख्याति ध्रुव की तरह चमकती है। उसके पस धन-वैभव एवं ऐश्वर्य की भी कमी नहीं होती। वह अपनी प्रज्ञा से समाज में विचारों एवं संस्कारों के बीज बोता है। रवींद्रनाथ टैगोर का व्यक्तित्व भी ऐसा ही था। उनकी कुंडली में सरस्वती योग किस रूप में फलित हो रहा है, आइए जानें...
By: गौतम पटेल
15-Mar-2015