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There are moments in life when logic feels incomplete. You may have all the information, all the facts, and yet something inside you still feels uncertain.
By: AIFAS
23-Mar-2026
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In the ancient wisdom traditions of India, the environment in which we live and work is not considered a passive backdrop. Instead, it is viewed as a living field of energy that constantly interacts with our body, mind, and destiny.
By: Future Point
12-Mar-2026
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Today, institutions like AIFAS have made it possible to learn this ancient science through well-designed online astrology courses and online astrology classes.
24-Feb-2026
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पुत्र पाने की चाह में एक के बाद एक भू्रण हत्याएं हो रही हैं, ऐसे में हमारे प्राचीन ऋषियों ने कुछ ऐसी चीजें खोजी हैं जिनका ध्यान गर्भाधान के समय रखने से बिना किसी चीरफाड़ के मनचाही संतान प्राप्त की जा सकती है। कैसे आइए जानें...
By: फ्यूचर पाॅइन्ट
01-Jan-2014
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आधुनिक भारतीय समाज में स्मृति ईरानी, दुर्गा शक्ति नागपाल, कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स आदि महिलाओं ने जो उपलब्धियां अर्जित की हैं और देश व समाज के लिए जो सराहनीय कार्य कर रही हैं उसके आधार पर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि उन्होंने पुरूषों से भी बेहतर कर दिखाया है। इसी कड़ी में समाज में फैले भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रही बी. चंद्रकला किसी सितारे से कम नहीं। एक आई. ए. एस. अधिकारी के रूप में करप्शन हटाने के अपने प्रयासो में ये जिस प्रकार के कदम उठा रही हैं उस आधार पर इन्हें लेडी सिंघम कहना ही उपयुक्त लगता है।
By: आभा बंसल
15-May-2015
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प्राचीन समय से जैसे हाथ की रेखाओं, चिह्नों आदि से भविष्य ज्ञात करके भविष्यवाणी की जाती है, उसी प्रकार यदि रेखा शास्त्री शरीर के अन्य अंगों के विषय में जानकार होता है तो भविष्यवाणी काफी सटीक होती है। वास्तव में शरीर के अन्य अंगों से फल जानकर रेखाओं के साथ यदि भविष्यवाणी की जाय तो वह अधिक सही होती है। हथेली की रेखाओं के बाद मनुष्य के ललाट की रेखाओं का अध्ययन करके की गई भविष्यवाणी जन्मकुंडली और हस्त रखाओं से की गई भविष्यवाणी के समकक्ष होती है।
By: के. के. निगम
15-Apr-2016
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ललाट को देखकर भविष्य की जानकारी अतः उस पर उभरी रेखाओं के विषय में सरलता पूर्वक बहुत कुछ कहा जा सकता है। मनुष्य का भूत, भविष्य और वर्तमान सभी कुछ उसके ललाट को देखकर उसका चरित्र, स्वभाव, मनोदशा का सारा हाल जाना जा सकता है। ललाट या मस्तक को दो भागों में बांटा गया है- 1. ऊपरी ललाट 2. निचला भाग। ऊपरी मस्तक सिर के सामने के भाग से मध्य तक के भाग को लेते हैं। निचले को हम मध्य ललाट से भौंहों तक के भाग को ले सकते हैं।
By: जय इंदर मलिक
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प्रचीन ग्रंथों में जिस नीलम का वर्णन मिलता है, वह वास्तव में नीलम न हो कर आज की लाजवर्त मणि (Lajward Stone) ही है। भले ही आज की नीलम ने लाजवर्त से वह उच्च आसन छीन कर उसे उपरत्न की श्रेणी में ला रखा हो.
By: मनोहर वर्मा
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प्रश्नः लाल किताब का ज्योतिषीय -आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व क्या है? इसमें जीवन के विभिन्न पहलुओं हेतु उपयोगी टोटके एवं उपायों का वर्णन फल सहित करें।
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लाल-किताब पद्धति में ग्रहों या भाव की दृष्टि प्राचीन ज्योतिष के दृष्टि सिद्धान्तों से कुछ भिन्न हैं। जैसे- एक-सात घर, चौथे दसवें, पूर्ण दृष्टि होती है।
By: उमेश शर्मा
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ज्योतिष में ग्रहों के दृष्टि संबंध जातक को शुभ अशुभ फल प्रदान करते हैं। लाल किताब पद्धति में ग्रहों की इन दृष्टियों के साथ साथ कुछ विशेष स्थितियों के बारे में भी कहा गया है। जिनका किसी भी कुंडली के फलित कथन में अपना महत्वपूर्ण स्थान होता है।
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लाल किताब में विभिन्न ग्रहों व राशियों की स्थितियों के अनुसार शरीर व आत्मा को मिलने वाले कष्टों को विभिन्न उपायों से दूर करने की विधि भी दी गई है। लाल किताब में वर्णित, पूर्व जन्मानुसार जातक के ऊपर विभिन्न ऋण व उनके उपाय इस प्रकार हैं।
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Lal Kitab Upay: सामुद्रिक शास्त्र पर आधारित लाल किताब के उपाय आजमा कर आप अपनी सोती हुई किस्मत को जगा सकते हो|
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लाल किताब में व्यक्ति की जन्म तिथि व समय के आधार पर कुंडली या वर्ष कुंडली आदि बनाकर ग्रहानुसार उपाय सुझाये जाते हैं परंतु जिन व्यक्तियों की अपनी कोई जन्म तिथि नहीं है या उनकी जन्मकुंडली नहीं है, उनके लिये भी लाल किताब में उनकी परेशानियों का हल है। इस लेख में व्यापार, नौकरी, स्वास्थ्य, धन, तनाव आदि विषयों से संबंधित लाल किताब के ऐसे ही कुछ लोकप्रिय व लाभदायक उपाय दिये जा रहे हैं जो जन्मकुंडली के बिना भी किये जा सकते हैं।
By: संजय बुद्धिराजा
15-Oct-2015
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लाल किताब फलित ज्योतिष एवं सरल-अचूक टोटके व उपाय का ग्रंथ है। इसी को ‘अरुण संहिता’ के नाम से भी जाना जाता है। इस संदर्भ में ऐसी मान्यता है कि ‘लाल किताब’ या ‘अरुण संहिता’ का ज्योतिषीय ज्ञान असुरराज रावण ने प्रत्यक्ष परमात्मा सूर्य देव के सारथी ‘अरुण’ से देव भाषा में सदियों पूर्व प्राप्त किया था। आदिदेव सूर्यनारायण की एक-एक किरण एक-एक नाड़ी है, जिसके कारण मनुष्य के भीतर शक्ति का प्रभाव सदा बना रहता है। सारथी अरुण को ‘लाल किताब’ का दार्शनिक ज्ञान प्राप्त हुआ परंतु कालांतर में यह दुर्लभ ग्रंथ अरब देश के ‘अद’ नामक शहर में पहुंच गया। वहां इसका अनुवाद अरबी (उर्दू) भाषा में हुआ।