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There are moments in life when logic feels incomplete. You may have all the information, all the facts, and yet something inside you still feels uncertain.
By: AIFAS
23-Mar-2026
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In the ancient wisdom traditions of India, the environment in which we live and work is not considered a passive backdrop. Instead, it is viewed as a living field of energy that constantly interacts with our body, mind, and destiny.
By: Future Point
12-Mar-2026
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Today, institutions like AIFAS have made it possible to learn this ancient science through well-designed online astrology courses and online astrology classes.
24-Feb-2026
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शास्त्रों के अनुसार देव ऋण, ऋषि ऋण एवं पितृ ऋण का जन्म जन्मांतरों तक मानव पर प्रभाव रहता है इसलिए शास्त्रों में पितृ देवो भवः, आचार्य देवो भवः, मातृ देवो भवः आदि संबोधन दिए गये हैं। वैसे ऋण का अर्थ है कर्ज, जिसको उसकी संतान व परिजनों द्वारा चुकाया जाना है। जब जातक पर उसके पूर्वजों के पापों का गुप्त प्रभाव पड़ता है तब पितृ दोष कहलाता है।
By: बाबुलाल शास्त्री
15-Sep-2016
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जन्मपत्री का नवम भाव भाग्य भाव कहलाता है। इसके अतिरिक्त इस भाव से पिता और पूर्वजों का विचार भी किया जाता है। धर्म शास्त्रों में यह मान्यता है कि पूर्व जन्म के पापों के कारण पितृ दोष का निर्माण होता है। व्यक्ति का जीवन सुख-दुःख से मिलकर बना होता है। किसी न किसी रुप में दुःख व्यक्ति के सदैव साथ बने रहते हैं। इस संसार में कोई भी व्यक्ति पूर्णतः सुखी नहीं है। कभी संतानहीनता, कभी नौकरी में असफलता, धन हानि, परिवारिक तनाव और कभी उन्नति न होने के कारण व्यक्ति को दुःख अपने प्रभाव में लिए रहते हैं।
By: फ्यूचर पाॅइन्ट
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पित्ताशय की पथरी होने के कई कारण है। लेकिन मुख्य कारण आहार है। असंयमित भोजन से पाचन क्रिया मंद हो जाती है जिसके फलस्वरूप दूषित द्रव्य संचित होकर पथरी का रूप धारण कर लेते हैं। आइए इस रोग के ज्योतिषीय कारणों का भी पता लगाएं ......
By: अविनाश सिंह
01-Jan-2014
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पित्ताशय की पथरी ज्यादातर 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में पाई जाती है। इससे यह अभिप्राय नहीं कि छोटी आयु में यह रोग हो ही नहीं सकता। खाने-पीने में अनियमितता और अनियंत्रित आहार ग्रहण करने से इस रोग की शुरूआत होती है। यह रोग उन लोगों को होने की संभावना अधिक होती है जो बैठकर कार्य करते हैं या जिनको हृदय या मधुमेह जैसी बीमारी होती है।
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यदि जन्मकुंडली में पितृदोष बनता हो तो संतान योग होने के बावजूद संतान की प्राप्ति नहीं हो पाती, पितृ दोष क्या होता है और उसकी शांति के क्या उपाय हैं। पितृदोष के निदान के बाद क्या संतान प्राप्ति का रास्ता सुगम हो जाता है, आइए जानें इस आलेख में ...
By: अशोक शर्मा
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पितृदोष से तात्पर्य पितरों की असंतुष्टि से है। जब किसी परिजन के द्वारा अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध इत्यादि कर्म नहीं किया जाए अथवा इन कर्मों को पितरों के द्वारा नकार दिया जाए, तो पितर असंतुष्ट होकर जो हानि पहुंचाते हैं, उसे ही पितृदोष कहते हैं। पितृदोष होने पर अनुकूल ग्रहों की स्थिति, गोचर और दशाएं होने पर भी शुभ फल नहीं मिल पाते। पितृदोष अदृश्य बाधा के रूप में जातक को परेशान करता है और उसके जीवन में सभी क्षेत्रों में उन्नति को बाधित कर देता है। परिजनों के मध्य वैचारिक मतभेद रहते हैं अथवा प्रयासों से कोई शुभ फल प्राप्ति का योग बने तो वह भी अकारण समाप्त हो जाता है।
By: अमित कुमार राम
15-Oct-2014
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जहां ‘कालसर्प योग’ में राहु व केतु की प्रमुख भूमिका होती है वहीं ‘पितृ दोष’ में राहु व शनि की भूमिका बताई जाती है। कुछ आचार्य इसे ‘पितृ ऋण’ की संज्ञा देते हैं। ‘कालसर्प योग’ के समान ही ‘पितृ दोष/ऋण’ से ग्रसित होने के लक्षण इस प्रकार बताए जाते हैं- कार्यों में असफलता, धन की कमी, विवाह तथा संतान कष्ट, परिवार के सदस्यों से मतभेद, किसी न किसी रोग से ग्रसित रहना, आदि।
By: सीताराम सिंह
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शरीर को स्फूर्तिवान बनाने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है। पिरामिड अपनी विशिष्ट आकृति के कारण उपयोगी ऊर्जा का प्रसार करते हैं। इनसे प्राप्त ऊर्जा का उपयोग अनेकानेक रोगों एवं मानसिक तनाव को दूर करने के लिए किया जा सकता है। मानव जीवन के लिए ये किस प्रकार उपयोगी होते हैं, आइए जानें...
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प्रश्न: वास्तु दोष सुधार हेतु भिन्न-भिन्न परिस्थितियों में बिना तोड़े फोड़े क्या उपाय किये जा सकते हैं? वास्तु उपायों में पिरामिड का उपयोग किस प्रकार किया जाना चाहिए? पिरामिड किस धातु का, कितनी दूरी पर तथा कितनी संख्या में लगाने चाहिये आदि की विस्तृत जानकारी दें।
15-Jan-2015
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पोंटी चड्ढा का असली नाम गुरुदीप सिंह चड्ढा था। उनका परिवार पार्टीशन के दौरान पाकिस्तान से मुरादाबाद शिफ्ट हुआ था और उनके पिता एक देशी शराब की दुकान के आगे तली मछली बेचा करते थे।
By: आभा बंसल
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बिहार राज्य के मोतीहारी जिले के सुशील कुमार ने कौन बनेगा करोड़पति प्रतियोगिता में पांच करोड़ जीतकर अपने प्रदेश एवं जिले का नाम तो रोशन किया ही है साथ ही अपने घर की दयनीय आर्थिक स्थिति भी सुधार ली।
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२४ अगस्त २००६ को प्राग अंतर्राष्ट्रीय खगोल संघ के २५०० से अधिक खगोलविदों के पुनर्विचार एवं पुन परिभाषा के कारण प्लूटो को अब केवल लघु ग्रहों की श्रेणी में स्थापित कर दिया गया है। पहले भी १८०१ में सरेस नामक लघु ग्रह की खोज हुई थी और उस समय
By: फ्यूचर समाचार