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There are moments in life when logic feels incomplete. You may have all the information, all the facts, and yet something inside you still feels uncertain.
By: AIFAS
23-Mar-2026
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In the ancient wisdom traditions of India, the environment in which we live and work is not considered a passive backdrop. Instead, it is viewed as a living field of energy that constantly interacts with our body, mind, and destiny.
By: Future Point
12-Mar-2026
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Today, institutions like AIFAS have made it possible to learn this ancient science through well-designed online astrology courses and online astrology classes.
24-Feb-2026
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लाल किताब के नियमानुसार शुक्र खाना नं। ९ में शादी के सुख के लिए अच्छा नहीं माना जाता बल्कि हलचल भरी शादी का कारण बनता हैं। यह स्थिति और भी ख़राब हो जाती है जब शुक्र खाना नं। ९ वाले जातक के घर में आने का द्वार दक्षिण की ओर होता हैं।
By: फ्यूचर पाॅइन्ट
01-Jan-2014
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टेवे में जो ग्रह उच्च का या अपने घर का हो, उस ग्रह की वस्तुए कभी दान नहीं करनी चाहिए। चन्द्रमा यदि खाना नं २ या ४ में हो तो चंद्रमा की वस्तुएं दूध, चावल, मोती का दान कभी नहीं करना चाहिए।
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लाल किताब में कालसर्प दोष का वर्णन तो नहीं किया गया है लेकिन लाल किताब के आधार पर राहु तथा केतु की शांति तथा प्रसन्नता हेतु विभिन्न सरल उपाय बताए गए हैं इस लेख में विभिन्न काल सर्प दोषों के संदर्भ में किए जाने वाले उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई है।
By: राजीव रंजन
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जिस पुरुष की कुंडली में शुक्र खाना नं. ६ में हो उसके ससुराल वालों को चाहिए। की सोने का क्लिप अपनी लड़की को दे। यदि शुक्र खाना नं। ४ में हो या सूर्य, राहु, चन्द्र खाना नं. १.५ तो ऐसे में जातक को चांदी का चौकोर टुकड़ा ससुराल वालों से लेकर हमेशा अपने पास रखना चाहिए।
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खाना न ६ का शनि खुद चाहे अच्छे फल दे किन्तु बृहस्पति के फल को खरब करता है इसलिए नारियल, अखरोट आदि पानी में बहाने चाहिए।
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पाराशरी ज्योतिष पद्धति व लाल किताब ज्योतिष पद्धति में कुछ भिन्नता पाई जाती है। पाराशरी पद्धति में लग्न को बहुत महत्व दिया गया है। किसी व्यक्ति के जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर जो राशि उदित हो रही होती है वह व्यक्ति की लग्न राशि कहलाती है।
By: तिलक राज
15-Oct-2015
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पराषरी ज्योतिष की विधियों और लाल किताब के मूलभूत सिद्धांतों में क्या विषिष्ट अंतर है इसकी स्पष्ट और सटीक जानकारी के लिए यह लेख उपयोगी है।
By: उमेश शर्मा
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लाल किताब नामक प्रसिद्ध ज्योतिष पुस्तक का परिचय, इतिहास एवं अन्य देषों के भविष्यवक्ताओं से इसका क्या संबंध रहा है तथा इसके सरल उपायों से क्या प्राप्तियां संभव हैं वह सब जानने का अवसर इस लेख में मिलेगा।
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- पंचमेश (सूर्य), तृतीयेश (बुध), एवं षष्ठेश (बुध), नवमेश (गुरु) एवं दशमेश (शनि), प्रत्यक्ष या परोक्ष किसी न किसी रूप में पिता एवं पिता की संपत्ति के कारक हैं। - गुरु एवं सूर्य, गुरु एवं बुध तथा गुरु एवं शनि किसी भी भाव में साथ-साथ बैठे हों तो वे पिता या पिता की संपत्ति से कोई सरोकार नहीं रखते, परंतु वे अपने से संबंधित वस्तुओं एवं व्यवसायों को पूर्ण रूप से प्रभावित कर सकते हैं, किंतु अपने संबंधियों को प्रभावित नहीं करते। वे केवल जातक के व्यक्तिगत जीवन और कुशल-क्षेम को ही प्रभावित करते हैं।
By: यशकरन शर्मा
15-Apr-2015
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लाल-किताब पद्धति में कुंडलीें की कुछ विशेष परिभाषाऐं दी गई हैं, वह फलादेश को समझने के लिए बहुत आवश्यक है तथा इन बुनियादी परिभाषाओं को समझे बगैर ग्रहों के प्रभाव को नही समझा जा सकता।
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सामान्य ज्योतिष और लाल किताब के फलित कथन में और समस्या निवारण के उपायों में मौलिक भिन्नता है। पांचवां घर और गुरु एक दूसरे से किस प्रकार संबंधित है, उसके बारे में लाल किताब में उपयोगी सिद्धांतों और उपायों के बारे में बताया गया है।
By: भगवान सहाय श्रीवास्तव
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लाल किताब वर्षफल बनाने का ढंग वैदिक ज्योतिष से बिल्कुल अलग है। वैदिक ज्योतिष में वर्षफल में सूर्य जन्मकालीन स्थिति पर ही आ जाता है। वर्ष में सूर्य के अंश, कला, विकला वही होते हैं जो जन्म के होते हैं।
By: डॉ. अरुण बंसल