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There are moments in life when logic feels incomplete. You may have all the information, all the facts, and yet something inside you still feels uncertain.
By: AIFAS
23-Mar-2026
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In the ancient wisdom traditions of India, the environment in which we live and work is not considered a passive backdrop. Instead, it is viewed as a living field of energy that constantly interacts with our body, mind, and destiny.
By: Future Point
12-Mar-2026
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Today, institutions like AIFAS have made it possible to learn this ancient science through well-designed online astrology courses and online astrology classes.
24-Feb-2026
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मां सरस्वती को विद्या, शिक्षा, ज्ञान, कला, संगीत की देवी के रूप में मान्यता प्राप्त है तथा अनेक वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि मां सरस्वती की कृपा के बिना किसी भी प्रकार की कला अथवा विद्या की प्राप्ति नहीं हो सकती। ज्ञान को संसार में सभी चीजों से श्रेष्ठ कहा गया है। इस आधार पर देवी सरस्वती सभी से श्रेष्ठ हैं। सरस्वती जी की उपासना से ही इंद्र शब्द शास्त्र और उसका अर्थ समझ पाए अतः ज्ञान प्राप्ति हेतु देवी की उपासना, पूजा ही श्रेयस्कर है। सरस्वती के प्रसाद से ही शुक्राचार्य सभी दैत्यों के पूज्यनीय गुरु हो गए। सरस्वती कृपा से ही भगवान वेद व्यास चारों वेदों को विभक्त कर संपूर्ण पुराणों की रचना कर पाए।
By: फ्यूचर पाॅइन्ट
01-Jan-2014
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मनुष्य के जीवन में सुख-दुख का मिश्रण उनके पूर्वजन्म के कर्मफल के अनुसार होता है। पीढ़ियों के अनुभव ने इस तथ्य को ‘‘सब दिन होत न एक समान’’ लोकोक्ति का रूप दे दिया है। ‘‘उत्तरकालामृत गं्रथ (6.2) के अनुसार ः ‘‘पुष्यंवाप्यथ पापरूपभपिवा कर्मार्जितं प्रागभवे। तत्पाकोऽत्र तु खेचरस्य हि दशाभुक्तयादिभिज्र्ञायते।।’’ अर्थात्, ‘‘पुण्य और पाप जो पूर्वजन्म के कर्मों द्वारा उपार्जित किये गये हैं, उनका फल इस जन्म में ग्रहों की दशा-भुक्ति द्वारा जाना जाता है।’’ अतः किसी व्यक्ति को जीवन में सुख और दुख की अनुभूति कब होगी इसका सटीक मार्गदर्शन इस व्यक्ति की जन्म कुंडली के वैदिक ज्योतिषीय विवेचन द्वारा जाना जा सकता है।
By: सीताराम सिंह
15-Apr-2016
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हेल्थ कैप्सूल के इस लेख क्रम में स्लिप डिस्क नामक समस्या का विस्तृत विवेचन, उपचार तथा सावधानियों का उल्लेख करने के साथ-साथ प्रत्येक लग्न वाले व्यक्तियों के संबंध में इस रोग की संभाव्यता का ज्योतिषीय दृष्टिकोण से विवेचन किया गया है। अमरूद जैसे लाभकारी फल के लाभों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी तथा सावधानियां बताई गई है।
By: अविनाश सिंह
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ईश्वर की जटिल कारीगरी का एक अनोखा नमूना है ‘मानव शरीर’। यह अनगिनत छोटी-छोटी कोशिकाओं से बना है। ये कोशिकाएं शरीर में रक्त, त्वचा, मांसपेशियों, हड्डियों तथा अन्य अंगों का निर्माण करती है। अस्थि तंत्र शरीर का विशेष अंग है, जिसकी प्रत्येक हड्डी की उसके कार्य के अनुरूप एक विशिष्ट आकृति होती है।
15-Aug-2016
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बहुत से बच्चों की तकदीर कुछ ऐसी होती है कि उन्हें अपने माता-पिता, कुटुम्बियों व सगे-संबंधियों के सुख से वंचित होना पड़ता है। गरीब परिवार में जन्मी फूल सी बच्ची सान्या के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। इसे ग्रह, नक्षत्रों का खेल ही कहेंगे कि उसे जन्म के पश्चात एक संपन्न परिवार की महिला ने बेटी के रूप में अपनाया तो सही परंतु वहां भी उसके मातृ सुख पर प्रश्न चिह्न लग गया।
By: आभा बंसल
15-Jul-2015
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जगत पिता ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को की थी अतः इसी पुनीत दिन को संवत्सर का आरंभ माना जाता है। इस बार इस संवत्सर 2063 का प्रवेश चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तदनुसार 29 मार्च 2006 बुधवार को अपराह्न 3 बजकर 47 मिनट पर हो रहा है, किंतु इसका आरंभ 30 मार्च 2006 गुरुवार को प्रातः काल से माना जाएगा।
By: उमाधर बहुगुणा
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आज के समय में महंगाई और भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच गया है। सरकार के लाख कोशिश करने के बाद भी महंगाई और भ्रष्टाचार रूक नहीं रहे हैं।
By: सुनील जोशी जुन्नकर
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आज के समय में यदि देखे तो अधिकार और सुरक्षा की बात महिलाओं की ही हो रही है, चाहे वह बसों में अधिक सीटें सुरक्षित करने की हो या महिलाओं के लिए अलग से महिला बैंक बनाने की बात हो।
By: विनय गर्ग
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जातक के कार्य, व्यवसाय निर्धारण में दशम भाव एवं सप्तम भाव का प्रभाव होता है। प्रस्तुत लेख में स्वतंत्र व्यवसाय के ग्रह योगों की विवेचना की गयी है।
By: अशोक सक्सेना
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मेदनीय ज्योतिष के अनुसार विवध कुयोग क्रोधी नामक संवत्सर के अशुभ फल को बल प्रदान करेंगे। आइए जानें संवत 2068 का राशिफल
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संवत् 2070 पराभव नामक संवत्सर था। क्रमानुसार 2071 का नाम प्लवंग होना चाहिए। लेकिन ऐसा
By: डॉ. अरुण बंसल
02-Oct-2014
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जो यथार्थ में नहीं है। अवास्तविक है उसे सच की भांति साकार रूप में देखने का नाम स्वप्न है। अर्थात जो अपना नहीं है, उसे निद्रा में आंखो के सामने देखना सपना है। नहीं को सही में देखना ही तो स्वप्न कहलाता है। आधुनिक विज्ञानियों ने स्वप्न विषयक जिन तथ्यों का पता लगाया।