How Numerology Can Help You in Daily Life

How Numerology Can Help You in Daily Life

How Tarot Card Reading Can Guide and Improve Your Daily Life

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How Tarot Card Reading Can Guide and Improve Your Daily Life

There are moments in life when logic feels incomplete. You may have all the information, all the facts, and yet something inside you still feels uncertain.

How Vastu Shastra Can Improve Your Daily Life

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How Vastu Shastra Can Improve Your Daily Life

In the ancient wisdom traditions of India, the environment in which we live and work is not considered a passive backdrop. Instead, it is viewed as a living field of energy that constantly interacts with our body, mind, and destiny.

How Astrology Can Help You Understand Your Personality and Life Path

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How Astrology Can Help You Understand Your Personality and Life Path

Today, institutions like AIFAS have made it possible to learn this ancient science through well-designed online astrology courses and online astrology classes.

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सूरत, सीरत और किस्मत

मेरी दादी कहा करती थी कि लड़कों की सीरत देखी जाती है सूरत नहीं और लड़कियों का ‘काम प्यारा होता है चाम नहीं’ आदि। बड़े बुजुर्गों की ये कहावतें आज भी उतनी ही सच हैं जितनी कि पहले थीं। परंतु ज्योतिष के आइने से देखें तो सूरत और सीरत के अलावा किस्मत भी बहुत जरूरी है।

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सर्प दोष विचार

सर्प की हत्या करने से यह दोष लगता है जिससे जातक संतानहीन होता हैं। शास्त्रों एवं पुराणों में भी सर्प की ह्त्या स्वयं करना या किसी दूसरे से करवाना पाप कर्म माना गया हैं। इस पाप के कारण जातक का वंश नष्ट हो जाता हैं। क्योंकि पुत्रोत्पति के साथ इस प्रकार की सर्प हत्याओं का सम्बन्ध होता हैं।

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सर्पदोष : शमन के उपाय

ज्योतिष के भिन्न भिन्न दोषों का वर्णन हैं। इसमें एक सर्पदोष हैं। सर्प भी काल का ही रूप हैं। तथा भय का प्रतीक हैं। सर्प हमारे यहाँ धन का रूप भी माना गया हैं। कुबेर को भी सर्प रूप में माना गया हैं।

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सूर्य

आदिकाल में जब ब्रह्माण्ड से ब्रह्मा जी की उत्पति हुई तो उन्होंने सर्वप्रथम ॐ का उच्चारण किया। यही ॐ दृष्टि का प्रथम शब्द था सूर्य का शरीर कहा जाता है। जब ब्रह्मा के चारों मुखों से वेद प्रकट हुए तब वे सूर्य के तेज से प्रकाशित हुए।

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सूर्य का नीच भंग राजयोग

नवग्रहों में सूर्य राजसी ग्रह माना जाता है। मेष राशि में सूर्य उच्चस्थ होते हैं और तुला राशि में नीचस्थ। प्रस्तुत है सूर्य के नीच भंग राजयोग का कुंडलीय विश्लेषण।

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सूर्य की किरणों से उपचार

शरीर को निरोगी रखने में सूर्य की किरणों का महत्वपूर्ण योगदान है। इन किरणों में ऐसी जीवन शक्ति विद्यमान होती है जिससे कई रोगों की जडें़ पनपने ही नहीं पातीं। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार इन किरणों में विटामिन ‘डी’ पाया जाता है। पेड़-पौधों में दिखाई देने वाली हरियाली भी इन्हीं की देन है। विभिन्न रोगों के उपचार में सूर्य की किरणें किस प्रकार सहायक होती हैं, आइए जानें...

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सूर्य ग्रहण एवं चंद्र ग्रहण

सूर्य ग्रहण तथा चंद्र ग्रहण का मानव जीवन पर पड़ने वाले शुभाशुभ प्रभावों का वैदिक काल से ही वर्णन प्राप्त होता है। पुराणों में इस विषय पर विस्तृत चर्चा मिलती है।

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सूर्य-शनि युति फलादेश

जन्मकुंडली में दो या अधिक ग्रहों के आपसी संबंध को ‘योग’ कहते हैं। इन संबंधों में ‘युति’ का अंतिम (चैथा) स्थान है। ग्रह योग पिछले जन्म के अच्छे-बुरे कर्मफल अनुसार बनते हैं जिसकी अनुभूति उन ग्रहों की दशा भुक्ति में जातक को होती है। इस लेख में सूर्य और शनि, दो विपरीत स्वभाव और कारकत्व वाले ग्रहांे की युति का फलादेश प्रस्तुत है।

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सर्वतोभद्र चक्र

प्रश्न: सर्वतोभद्र चक्र क्या है? इसे जन्मांक एवं गोचर के फलादेश के लिए कैसे प्रयोग में लाया जाता है? मेदिनीय ज्योतिष मंे इसका क्या और कैसे उपयोग किया जाता है?

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सर्वोत्तम माह: पुरूषोत्तम मास

श्री विक्रम संवत् 2072 में आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से आषाढ़ कृष्ण अमावस्या तक अर्थात् 17 जून से 16 जुलाई सन् 2015 तक अधिक मास रहेगा। अधिक मास क्यों होता है और कब पड़ता है, आइये इसे समझें। वे महीने शुद्ध कहलाते हैं, जिनमें सूर्य की संक्रांति होती है। किंतु जिस चंद्रमास में सूर्य की संक्रांति अर्थात राशि परिवर्तन नहीं होता, वह मास अधिक मास कहलाता है। इस वर्ष आषाढ़ मास में (17 जून से 15 जुलाई तक) सूर्य संक्रांति न होने के कारण प्रथम आषाढ़ मास अधिक मास या मलमास कहलायेगा।

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सुरेश की वैलेन्टाइन

सुरेश जी और उनके बेटे मोहन की जिंदगी की दास्तां कुछ इस तरह आगे बढ़ी है कि कहना पड़ता है कि किसी को मुकम्मिल जहां नहीं मिलता, कहींे ज़मीं, कहीं आसमां नहीं मिलता।

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सरस्वती यंत्र से विद्या प्राप्ति

वैदिक ज्योतिष हजारों सालों से भी सरस्वती यंत्र का प्रयोग विद्या प्राप्ति के लिए तथा अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त करने के लिए करता रहा है तथा आज भी श्री सरस्वती यंत्र के विधिवत प्रयोग से अनेक प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण की जा सकती हैं। श्री सरस्वती यंत्र के साथ की जाने वाली मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ श्री सरस्वती यंत्र का प्रयोग करना विशेष लाभकारी रहता है।