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There are moments in life when logic feels incomplete. You may have all the information, all the facts, and yet something inside you still feels uncertain.
By: AIFAS
23-Mar-2026
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In the ancient wisdom traditions of India, the environment in which we live and work is not considered a passive backdrop. Instead, it is viewed as a living field of energy that constantly interacts with our body, mind, and destiny.
By: Future Point
12-Mar-2026
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Today, institutions like AIFAS have made it possible to learn this ancient science through well-designed online astrology courses and online astrology classes.
24-Feb-2026
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रह प्रकार के काल सर्प योगों में पद्म नामक काल सर्प योग कुंडली के पंचम भाव से संबंधित है। पंचम भाव संतान, शिक्षा, पूर्वजन्म के कर्म आदि का भाव है। इस योग के कारण संतान सुख में रुकावट आती है, शिक्षा में बाधा उत्पन्न होती है और निरंतर चिंता और परेशानी के कारण जातक का जीवन संघर्षमय बना रहता है।
By: दिलीप कुमार
01-Jan-2014
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कैसे जानें कि जातक को पुत्र या पुत्री संतान की प्राप्ति होगी? संतान सुख होने या न होने के ज्योतिषीय कारण क्या हैं? विस्तृत वर्णन करें। उत्तर: जीवन के सभी सुखों में संतान सुख का एक अलग ही स्थान है। न तो पुरुष नपुंसक कहलाना चाहता है न स्त्री बांझ कहलाना चाहती है। भारतीय हिंदू धर्म ग्रंथों में जिन पांच प्रकार के ऋणों की व्याख्या की गई है, उनमें से एक पितृ ऋण’ तथा उसी प्रकार ‘मातृ ऋण’ भी है। यह ऋण बगैर संतानोत्पत्ति के नहीं चुकाया जा सकता।
By: फ्यूचर पाॅइन्ट
15-Jun-2016
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यदि किसी व्यक्ति को संतान प्राप्ति में समस्या आ रही हो, तो ऐसे व्यक्ति इस लेख में लिखे गये सरल उपायों को अपना कर संतान की प्राप्ति अति ही सहजता के साथ कर सकते हैं। किंतु उपायों को अति सावधानी से व श्रद्धा के साथ करना अति आवश्यक होता है। उपाय निम्नवत हैं:
By: ओम प्रकाश दार्शनिक
15-Oct-2014
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सामाजिक जीवन में पारिवारिक खुशी एवं पितृ ऋण के मुक्ति बाबत आगम एवं आर्ष ग्रंथों में संतान का जन्म लेना दंपत्ति के लिए मंगलमय माना गया है। आइये हम अध्यात्मवाद एवं सरलतम् उपायों से चाहे बंध्या हो, काक बंध्या हो, कन्या बंध्या या मृत वत्सा हो। सबके लिए निम्न उपाय श्रद्धा से करें तो इच्छित संतान की प्राप्ति संभव है।
By: नीलम शर्मा
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घर आंगन बच्चों की किलकारियों से गूंजे, वंशवृद्धि हो, बुढ़ापे में सेवा हो और भी न जाने कितनी बातें सोच कर लोग संतान प्राप्ति के लिए क्या-क्या नहीं करते। किसी भी व्यक्ति की जन्मकुंडली देखकर यह बताया जा सकता है कि उसकी संतान कब होगी, कितनी होगी, कैसी होगी और होगी या नहीं, इस आलेख में संतान विषयक ज्योतिषीय योगों का विवेचन किया गया है...
By: राजेंद्र कुमार जोशी
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1.यदि पंचम भाव, पंचमेश और संतानकारक गुरु राहु के द्वारा (युति या दृष्टि) पीड़ित हों सर्प श्राप से संतान बाधा आती है। उपाय जप: ऊँ रां राहवे नमः या ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः 18000 बार जप शनिवार को करें।
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करियर बनाने एवं पढ़ाई के चलते ज्यादातर लड़कियां देर से शादी करना पसंद करती हैं। लेट शादी से प्रेग्नेंसी में भी देरी होती है। शादी की उम्र बढ़ने के साथ प्रजनन की क्षमता कम होती है। लाइफ स्टाइल, स्ट्रेस और पाॅल्यूशन प्रजनन क्षमता पर बड़ा खतरा बन गया है। हर चार में से एक महिला इनफर्टिलिटी का शिकार हो रही है। पहला बच्चा 25 से 30 के बीच हो जाना चाहिए। शादी 35 के बाद हो तो बच्चा होने की संभावना 60 प्रतिशत कम हो जाती है।
15-Feb-2015
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जातक की संतान के जन्म समय व लिंग निर्धारण हेतु पति-पत्नी में से किसकी कुंडली का तथा कैसे विचार करना चाहिए विस्तार पूर्वक वर्णन करें।
15-Jul-2016
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संतान का सुख मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा सुख है। शास्त्रानुसार पुत्र-संतान के बिना दंपत्ति की सद्गति नहीं होती। विवाह का एक प्रमुख उद्देश्य संतान प्राप्ति भी है। संतान ही वंश को आगे बढ़ाती है तथा सामाजिक व सांस्कृतिक चक्र को निरंतर बनाए रखती है। संतान का अभाव दांपत्य जीवन के कष्टप्रद होने का एक प्रमुख कारण है। संसार का प्रत्येक स्त्री-पुरूष संतान उत्पन्न कर तथा उसका पालन-पोषण कर अपने ऋण से मुक्त होने की अभिलाषा रखता है।
By: राजेंद्र कुमार शर्मा
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आज के युग में जीवन को स्थायी व सुदृढ़ ढंग से जीने के लिए धन का होना बड़ा महत्व रखता है। बिना धन के इस युग में जीने की कल्पना तक आप नहीं कर सकते। धन प्राप्त करने के लिए आप के पास स्थायी रोजगार या नौकरी होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिना स्थायी रोजगार या नौकरी के आप अपने जीवन व परिवार का पालन पोषण ठीक ढंग से नहीं कर सकते किंतु इस प्रतिस्पर्धा के युग में स्थायी रोजगार व नौकरी मिल पाना बड़ा ही कठिन कार्य हो गया है
By: रिपन गुलाटी
15-Jun-2015
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छाया ग्रह केतु परम पुण्यदायी और मोक्ष कारक है। जिस ग्रह के साथ केतु बैठता है उसी के अनुसार कार्य करता है। सामान्यतः यह मंगल के समान कार्य करता है। केतु की अच्छी स्थिति के बिना मोक्ष प्राप्ति संभव नहीं है।
By: सुनील जोशी जुन्नकर
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बाल किसी भी स्त्री के सौंदर्य तथा पुरुष के व्यक्तित्व मंे अहम भूमिका निभाते हैं। मुख्य रूप से किसी व्यक्ति के सिर पर कितने बाल होंगे, यह जन्म के समय ही तय हो जाता है। हर व्यक्ति के प्रतिदिन औसतन 100 बाल टूट जाते हैं और नये आते रहते हैं।
By: वेद प्रकाश गर्ग