How Numerology Can Help You in Daily Life

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How Tarot Card Reading Can Guide and Improve Your Daily Life

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How Tarot Card Reading Can Guide and Improve Your Daily Life

There are moments in life when logic feels incomplete. You may have all the information, all the facts, and yet something inside you still feels uncertain.

How Vastu Shastra Can Improve Your Daily Life

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How Vastu Shastra Can Improve Your Daily Life

In the ancient wisdom traditions of India, the environment in which we live and work is not considered a passive backdrop. Instead, it is viewed as a living field of energy that constantly interacts with our body, mind, and destiny.

How Astrology Can Help You Understand Your Personality and Life Path

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How Astrology Can Help You Understand Your Personality and Life Path

Today, institutions like AIFAS have made it possible to learn this ancient science through well-designed online astrology courses and online astrology classes.

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विदेश यात्रा

कुंडली से कैसे जानें कि जातक विदेश यात्रा करेगा। जातक विदेश यात्रा कब और किन उद्देश्यों से करेगा। अपने उद्देश्य की प्राप्ति हेतु विदेश यात्रा करने के लिए क्या ज्योतिषीय उपाय हैं, इसका विस्तृत विवेचन करें।

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विदेश यात्रा योग : एक विश्लेषण

अधिकांश व्यक्ति कर्क, सिंह व् तुला लग्नों के थे और मीन लग्न की कुण्डलियां सबसे कम थीं। राशियों में मेष राशि अधिकांश कुंडलियों में विद्यमान थी। कर्क लग्न के लिए शनि लग्न में गुरु चतुर्थ भाव में एवं राहू द्वादश भाव में और गुरु सप्तम भाव में गोचर में था।

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विदेश यात्रा योग: एक विश्लेषण

हाल ही में 22-23 जुलाई 2006 को बैंकाक में एवं 30 जुलाई 2006 को सिंगापुर में अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन में सम्मिलित होने के लिए 97 व्यक्तियों का एक प्रतिनिधिमंडल भारत से थाइलैंड व सिंगापुर गया था। एक साथ इतने व्यक्ति विदेश यात्रा पर निकले, इसके पीछे अवश्य ही कोई न कोई ग्रह योग रहा होगा।

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विधाता ने जब सब कुछ कुंडली में लिखा है तो उपाय क्यों?

विधि के लिखे लेख ऐसी गूढ़ लिपि में लिखे होते हैं जिसकी भावार्थ, शब्दार्थ सहित पूर्ण व्याख्या कभी संभव नहीं हो सकती। फलतः मनुष्य के कर्म क्षेत्र में उपायों की गुंजाइश बनी ही रहती है।

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विधान सभा चुनाव 2017 ज्योतिषीय विश्लेषण

सभा चुनाव की घोषणा की गई है जिसकी वजह से पांच राज्यों में राजनैतिक हलचल बढ़ गयी है। 27 जनवरी 2017 से शनि ग्रह अपनी राशि बदलेंगे जिससे मकर व धनु राशि वाली पार्टियांे या पार्टी उम्मीदवारों को आशा के अनुरूप फल नहीं मिलेंगे। उत्तरांचल, गोवा और मिजोरम में मुख्य तीन ही राजनैतिक पार्टियां हैं लेकिन पंजाब एवं उत्तर प्रदेश में कई पार्टियां हैं।

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विभिन्न कालसर्प योगों के प्रतिफल

अनंत कालसर्प योग के कारण व्यक्ति के जीवन में संघर्ष, विराग, अपनों से तना-तनी असहयोग, गृहस्थ जीवन में नीरसता छा जाती है।

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विभिन्न भावों के विशिष्ट फल

- दीर्घायु संतान व समृद्धि लग्नेश, गुरु या शुक्र केंद्र में स्थित हो। - पूर्णायु लग्नेश गुरु से केंद्र में तथा कोई शुभ ग्रह लग्न से केंद्र में। - सुखी जीवन लग्नेश लग्न से या चंद्र से केंद्र में हो तथा उदित भाग में हो। (सप्तम से दशम तक व दशम से लग्न तक उदित भाग) या नवमेश-लग्नेश की युति दशम में हो। - उच्च शिक्षा नवमेश-लग्नेश की युति केंद्र में हो और उन पर पंचमेश की दृष्टि हो।

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विभिन्न भावों में मंगल का फल

जन्मकुंडली के प्रथम भाव में मंगल जातक को साहसी, निर्भीक, क्रोधी, किसी हद तक क्रूर बनाता है, पित्त रोग का कारक होता है तथा चिड़चिड़ा स्वभाव वाला बनाता है। उसमें तत्काल निर्णय लेने की क्षमता होती है तथा वह लोगों को प्रभावित करने तथा अपना काम करवाने की योग्यता रखता है। वह अचल संपत्ति उत्तराधिकार से प्राप्त करता है। साथ ही साथ स्वयं के प्रयास से भी निर्माण करता है। परन्तु यदि इस भाव में मंगल नीच का हुआ तो जातक दरिद्र, आलसी, असंतोषी, उग्र स्वभाव का, सुख में कमी, कठोर, दुव्र्यसनी तथा पतित चरित्र वाला बना सकता है। जातक को नेत्रों के कष्ट तथा पांचवें वर्ष में जीवन पर संकट का भय होता है।

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विभिन्न लग्नों के लिए रत्न / रूद्राक्ष चयन

प्रत्येक लग्न के लिए एक ग्रह ऐसा होता है जो योगकारक होने के कारण शुभ फलदाई होता है। यदि ऐसा ग्रह कुण्डली में बलवान अर्थात् उच्चराषिस्थ, स्वराषि का या वर्गोत्तमी होकर केन्द्र या त्रिकोण भाव में शुभ ग्रह के प्रभाव में स्थित हो व इस पर किसी भी पाप ग्रह का प्रभाव न हो तो यह अकेला ही जातक को उन्नति देने में सक्षम होता है अतः इसका रत्न धारण करना विषेष शुभ फलदाई तथा चमत्कारी प्रभाव देने वाला होगा परन्तु यदि यह अषुभ भाव में अषुभ ग्रहों के प्रभाव से ग्रस्त हो तो जातक इस योगकारक ग्रह के चमत्कारी प्रभाव से वंचित रह जाता है।

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विभिन्न लग्नों में रत्न चयन

लग्न व्यक्तित्व का द्योतक है। मेषादि बारह लग्नों में अलग-अलग रत्न चयन या धारण करने का महत्व है। दशा-अंतर्दशा अथवा गोचर में कुछ समय के लिए रत्न धारण कर सकते हैं, लेकिन मुख्यतया लग्नेश, पंचमेश एवं भाग्येश के रत्न धारण करने से जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति मिल सकती है।

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विभिन्न लग्नों में सप्तम भावस्थ गुरु का प्रभाव एवं उपाय

पौराणिक कथाओं में गुरु को भृगु ऋषि का पुत्र बताया गया है। ज्योतिष शास्त्र में गुरु को सर्वाधिक शुभ ग्रह माना गया है। गुरु को अज्ञान दूर कर सदमार्ग की और ले जाने वाला कहा जाता है।

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विराट कोहली - अनुष्का शर्मा

कहते हैं जोड़ियां स्वर्ग में बनती हैं और भगवान सभी रिश्ते ऊपर से बनाकर भेजता है। बच्चा जन्म के साथ ही इन सभी रिश्तों में बंध जाता है, लेकिन एक रिश्ता ऐसा भी होता है जो उसे जन्म के साथ नहीं मिलता। वो है उसके परफेक्ट पार्टनर का, जिसको पाने का ज्यादातर लोग सपना देखते रहते हैं। ज्योतिष शास्त्र मानता है कि हमारा जीवनसाथी और भाग्य सितारे और ग्रह तय करते हैं।