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There are moments in life when logic feels incomplete. You may have all the information, all the facts, and yet something inside you still feels uncertain.
By: AIFAS
23-Mar-2026
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In the ancient wisdom traditions of India, the environment in which we live and work is not considered a passive backdrop. Instead, it is viewed as a living field of energy that constantly interacts with our body, mind, and destiny.
By: Future Point
12-Mar-2026
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Today, institutions like AIFAS have made it possible to learn this ancient science through well-designed online astrology courses and online astrology classes.
24-Feb-2026
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जन्मपत्री में कौन से योग बनने पर व्यक्ति भूमि या भवन प्राप्त कर सकता है और इस प्रकार की प्राप्तियों से उसे वास्तव में कोई लाभ होगा या नहीं, जानने के लिए पढिए यह लेख।
By: जयप्रकाश शर्मा (लाल धागे वाले)
01-Jan-2014
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मानव शरीर इस सृष्टि के ही अंगभूत पंच तत्वों यथा पृथ्वी, जल आकाश, अग्नि और वायु ये पंच महाभूत नैसर्गिक ऊर्जाओं के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। हम इस धरा पर कहीं भी निवास करें, अपनी जीवन शैली को इन पंच तत्वों व नैसर्गिक ऊर्जाओं के अनुरूप ढालना अनिवार्य है। इसी में अंतर्निहित है, वैश्विक मांगल्य में वास्तुशास्त्र की भूमिका।
By: फ्यूचर समाचार
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भवन में पूजा कक्ष, सीढ़ी, किस दिशा में होनी चाहिए जिससे कि सकरात्मक ऊर्जा प्राप्त हो सकें एवं सुख समृद्धि की प्राप्ति हो सके आइए जानें वास्तु शास्त्री प्रमोद कुमार सिन्हा जी से
By: प्रमोद कुमार सिन्हा
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विक्रम संवत् 2067 का आरंभ आगामी 15-16 मार्च को मध्य रात्रि 02 बजकर 32 मिनट पर मंगलवार को हो रहा है। इस समय धनु लग्न उदित है जिसकी कुंडली नीचे दी गई है।
By: प्रेम शंकर शर्मा
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गणतंत्र दिवस के 68वें वर्ष प्रवेश कुंडली (वर्ष कुंडली) में भारत वर्ष 26 जनवरी 2017 ई., गुरुवार, चतुर्दशी तिथि, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्रकालीन वृष लग्न में प्रवेश करेगा। वर्ष लग्नेश शुक्र दशम भाव में केतु से युक्त है। नवम भाव योजना विकास का है। वहां सूर्य शत्रु राशि में स्थित है। उस पर गुरु व शनि की शत्रु व नीच दृष्टियां पड़ रही हैं।
By: रमेश सेमवाल
15-Jan-2017
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संवत प्रवेश कुंडली में दशम भाव में गुरु की स्थिति यह बता रही है की राष्ट्रपति महोदय महत्वपूर्ण व् ऐतिहासिक निर्णय लेने में सक्षम हो सकेंगे। एकादशेश बुध के अष्टम भाव में गोचराशिस्थ होने से संसद, प्रधानमंत्री, कानून व् शासन व्यवस्था पूर्व की भांति पंगु रहेगी।
By: यशकरन शर्मा
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विज्ञान और ज्योतिष दोनों का विषय क्षेत्र ब्रह्मांड है। ऋग्वेद आदि ग्रंथों में चंद्र और सोम के संबंध में विशद चर्चा की गई है। प्रसिद्ध ग्रंथ जिंदावेस्ता में भी चंद्र से संबद्ध उल्लेख मिलता है। इन ग्रंथों में चंद्र का सोम से निकट का संबंध बताया गया है और सोम को इंद्र से भी अधिक महत्व दिया गया है। यहां उसी चंद्र के ज्योतिष से संबंध का वर्णन प्रस्तुत है...
By: फ्यूचर पाॅइन्ट
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चंद्रमा पर मानव के चरण पड़ चुके है। किन्तु अभी उसे यह जानने में बहुत समय लगेगा की विश्व का वातावरण बनाने में चंद्र की क्या भूमिका है। सौर और चंद्र वातावरण के संपर्क-संघर्ष से कौन सी शक्ति उत्पन्न होती है, जो हम पृथ्वीवासियों के लिए उपादेय बन जाती है।
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जातक की कुंडली से कैसे जानें कि उसकी विद्याध्ययन में रूचि होगी और वह मेधावी छात्र बन पाएगा कि नहीं? शिक्षा में अवरोध उत्पन्न करने वाले क्या कारण है ? उनके उपाय और उच्च शिक्षा में सफलता प्राप्ति हेतु क्षेत्र का चुनाव आदि विषयों की जानकारी प्रस्तुत लेख में दी गई है।
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विद्या में बाधा उत्पन्न होना एक गंभीर विषय है। विद्या के अभाव से आज किसी भी व्यक्ति द्वारा जीवन को ठीक प्रकार से जी पाना असंभव है। प्रत्येक कार्य में किसी न किसी ग्रह एवं भाव की भूमिका होती है। विद्या के लिए ज्योतिषीय आधार पर निम्न कारक हैं: 1. पंचम भाव एवं पंचमेश 2. नवम भाव एवं नवमेश 3. विद्या का मुख्य कारक देव गुरु बृहस्पति तथा द्वितीय भाव एवं उसका स्वामी।
By: जय इंदर मलिक
15-Mar-2016
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ज्योतिष शास्त्र में विद्या प्राप्ति हेतु पंचम भाव, द्वितीय भाव के स्वामियों की स्थिति, पंचम तथा द्वितीय भाव में स्थित ग्रह, पंचमेश तथा द्वितीयेश के साथ शुभ तथा अशुभ ग्रहों की युति, कुंडली में चंद्रमा, सूर्य, बृहस्पति तथा बुध ग्रह की स्थिति तथा इन पर पड़ने वाले शुभ तथा अशुभ ग्रहों की दृष्टि एवं युति, दशमेश तथा दशम भाव की स्थिति के साथ-साथ चतुर्विंशांश कुंडली एवं कारकांश कुंडली के अध्ययन से शिक्षा की प्राप्ति एवं बुद्धि तथा तर्कशक्ति के बारे में आकलन किया जाता है।
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आज विदेश जाने की ललक हर किसी के मन में है। अधिकतर लोग तो विदेश में स्थायी रोजगार को ध्यान में रखकर ही शिक्षा अर्जित करते हैं। विदेश जाने के प्रयास सभी लोग करते हैं लेकिन सफलता सभी को नहीं मिलती। किन ग्रह दशाओं में विदेश यात्रा के योग बनते हैं आइए जानें...
By: निर्मल कुमार झा