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There are moments in life when logic feels incomplete. You may have all the information, all the facts, and yet something inside you still feels uncertain.
By: AIFAS
23-Mar-2026
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In the ancient wisdom traditions of India, the environment in which we live and work is not considered a passive backdrop. Instead, it is viewed as a living field of energy that constantly interacts with our body, mind, and destiny.
By: Future Point
12-Mar-2026
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Today, institutions like AIFAS have made it possible to learn this ancient science through well-designed online astrology courses and online astrology classes.
24-Feb-2026
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धनागमन का मुख्य उपाय लक्ष्मी-कुबेर का स्तोत्र माना गया है। कुबेर देवताओं के कोषाधिपति हैं।
By: डॉ. अरुण बंसल
11-Jan-2002
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बचपन से मस्तमौला जीवन जीने वाले चेतन को उसके माता-पिता ने परिणय सूत्र में बांध उसके जीवन में स्थायित्व लाने का प्रयत्न किया। लेकिन उसके अस्थिर मन ने एक पत्नी को छोड़ दूसरी का हाथ थाम लिया, उसके बाद भी उसे वैवाहिक जीवन का सुख क्यों नहीं मिल पाया, प्रस्तुत है इसका ज्योतिषीय विश्लेषण...
By: आभा बंसल
01-Jan-2014
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हाल ही में प्लूटो के आगे १०वें ग्रह की खोज की गई है। खोगोलज्ञों ने कैलिफोर्निया की पालोमर वेधशाला में सेडना नामक १०वें ग्रह का पता लगाया है। यह ग्रह पृथ्वी से १३ अरब कि. मी. दूर है। इसका व्यास लगभग १२०० कि. मी. हैं। इसका रंग मंगल से भी अधिक लाल
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पृथ्वी सूर्य के चरों ओर चक्कर लगाती रहती हैं। एक चक्कर लगाने में पृथ्वी को 365.2422 दिन लगते हैं। यही एक वर्ष का मान हैं। चन्द्रमा की दो प्रकार की गति हैं। एक पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाने में इसे 27.32 दिन लगते हैं।
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- अश्विनी नक्षत्र में कांस्य पात्र में घी भरकर दान करने से रोग मुक्ति होती है। - भरणी नक्षत्र में ब्राह्मण को तिल एवं धेनु का दान करने से सद्गति प्राप्त होती है व कष्ट कम होता है। - कृतिका नक्षत्र में घी और खीर से युक्त भोजन ब्राह्मण व साधु संतांे को दान करने से उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
By: निधि चोैहान
15-Oct-2014
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नक्षत्र तारों समूहों से बने हैं आकाश में जो असंख्य तारक मंडल विभिन्न रूपों और आकारों में दिखलाई पड़ते हैं, वे ही नक्षत्र कहे जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र में ये नक्षत्र एक विशिष्ट स्थान रखते हैं।
By: नवीन राहुजा
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ज्योतिष शास्त्र में मृत्युदायी रोग का विचार दूसरे और सप्तम भाव से किया जाता है क्योंकि ये मारकेश भाव होते हैं। इन भावों के सहायक रोग देने वाले भाव तृतीय, षष्ठ, अष्टम एवं द्वादश होते हैं। जिस समय मारकेश की महादशा होती है,
By: पारस राम वशिष्ट
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गगन मंडल में ग्रहों की स्थिति का पता करने के लिए देवताओं ने वृताकार आकाश या भचक्र के ३६० अंशों को १२ समान खण्डों में बांटा। तीस अंश के ये भाग राशि कहलाये। जिस भाग का जैसा स्वरूप दिखाई देता है उसी के आधार पर राशियों का नामकरण किया हैं।
By: बसंत कुमार सोनी
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शनि ग्रह का उपरोक्त बारह अवस्थाओं में स्थित होने का फल निम्न प्रकार होता है: 1). शयनावस्था में शनि ग्रह हो तो: व्यक्ति सदा असंतोषी, असंतुष्ट रहता है। युवावस्था तक कुछ न कुछ रोग रहता है तथा युवावस्था के बाद सफल व भाग्य का साथ पाने वाला होता है। 2) उपवेशनावस्था में शनि हो तोः व्यक्ति मोटे सूजे या वायु विकार से युक्त पैरों वाला, चर्मरोगों से पीड़ित, राज्य से धन हानि, पिता के लिए हानिकारक व नित्य पीड़ित होता है। 3) नेत्रपाणि में शनि हो तो:
By: अमित कुमार राम
15-Feb-2017
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नौ ग्रह एवं सताइस नक्षत्र भारतीय ज्योतिष का वह आधार है जो हमारे जीवन के महत्वपूर्ण कार्यो को प्रभावित करता है। अतः गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह, कृषि वाहन खरीदने के लिए नक्षत्रों का उपयोगी एवं व्यवहारिक ज्ञान बहुत आवश्यक है।
By: भगवान सहाय श्रीवास्तव
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वैदिक काल में वार के स्थान पर नक्षत्र दिवस के प्रयोग की परम्परा नक्षत्र ज्ञान की प्राचीनता का साक्षात उदाहरण हैं। शास्त्रों से विदित होता हैं। उस काल में वर्तमान व् भविष्य के दिशा निर्देशन या फलादेश में राशियों की जगह नक्षत्रों या तारों को ही मुख्य रूप से प्रधान व् प्रभावकारी माना जाता था।
By: सुल्तान फैज ‘टिपू’
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नक्षत्रों की खोज राशियों से पहले हुई थी। पृथ्वी से नक्षत्र राशियों से भी अधिक दूरी पर स्थित हैं। पृथ्वी से नक्षत्र राशियों से भी अधिक दूरी पर स्थित हैं। नक्षत्रों को अन्य धर्म में तारों के नाम से भी जाना जाता हैं।
By: विनय गर्ग