View:72
There are moments in life when logic feels incomplete. You may have all the information, all the facts, and yet something inside you still feels uncertain.
By: AIFAS
23-Mar-2026
View:134
In the ancient wisdom traditions of India, the environment in which we live and work is not considered a passive backdrop. Instead, it is viewed as a living field of energy that constantly interacts with our body, mind, and destiny.
By: Future Point
12-Mar-2026
View:207
Today, institutions like AIFAS have made it possible to learn this ancient science through well-designed online astrology courses and online astrology classes.
24-Feb-2026
View:7521
रिश्तों की डोर बहुत नाजुक होती है, फिर चाहे वह पति-पत्नी हों, सास-बहू हों, पिता पुत्र हों या फिर भाई-भाई, इनके बीच कभी न कभी आपस में टकराव हो ही जाता है। यदि बात नोकझोंक तक सीमित रहे तो ठीक लेकिन यदि कलह का रूप लेने लगे तो पारिवारिक वातावरण तनावपूर्ण हो जाता है। इस आलेख में अनेक प्रकार की समस्याओं के निदान एवं गृह कलह निवारण के अनुभूत उपाय दिए जा रहे हैं...
By: प्रवीण सोनी
01-Jan-2014
View:117943
गृह कलह की कोई न कोई वजह जरुर होती है जिसे पति – पत्नी के तनाव का मुख्य कारण उनके घरवालों को लेकर उत्पन्न कलह होती है। कलह के कारण कई बार तो दाम्पत्य जीवन में तनाव इतना बढ़ जाता है की तलाक तक की नौबत आ जाती है।
By: प्रवीन जोशी
View:6657
क्या किसी व्यक्ति विशेष के गृह वास्तु से उसकी आर्थिक, पारिवारिक, समृद्धि, स्वास्थ्य, भौतिक संरचना, मानसिक स्थिति, कार्य क्षेत्र तथा संतान सुख आदि के बारे में जाना जा सकता है?
By: फ्यूचर पाॅइन्ट
15-Aug-2015
View:5281
आधुनिक युग में सुंदर व सुसज्जित आवास की चाहत सभी को होती है। परंतु सभी की यह अभिलाषा पूर्ण नहीं हो पाती। जन्म कुंडली में स्थित ग्रहों की स्थिति इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार होती है, प्रस्तुत है गृह सुख एवं गृह बाधा देने वाले योगों की जानकारी...
View:7546
गोचर का विश्लेषण करने के लिए चंद्र लग्न एवं अन्य ग्रहों का किस प्रकार प्रयोग करना चाहिए, इससे संबंधित नियमों का विस्तृत रूप से उदाहरण सहित वर्णन करें।
View:4282
गर्मी के मौसम में खुद को बचाने के लिए हम महिलाएं क्या-क्या नहीं करतीं।
By: तन्वी बंसल
View:15739
भगवान बुद्ध संसार के महानतम व्यक्ति हुए। हर ज्योतिर्विद यह जानने की इच्छा रखता है कि कैसी रही होगी उनकी जन्म कुंडली। आइए, जानें ...
By: यशकरन शर्मा
View:18270
‘‘बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघ शरणं गच्छामि, उपर्युक्त दीक्षा मंत्र ग्रहण करके कोई भी बिना किसी भेद भाव के बुद्ध की शरण प्राप्त कर सकता था। किंतु भिक्षु संघ में प्रवेश हेतु केवल यह दीक्षा मंत्र ही पर्याप्त नहीं था। आगे की साधना भी अनिवार्य थी।
By: शरद त्रिपाठी
15-Jan-2016
View:15758
यदि कुंडली का ध्यायन ज्योतिषीय नियमों के आधार पर किया जाए, तो ज्योतिष से जातक के जीवन में होने वाले हर घटना के समय को जाना जा सकता है। घटना के समय को जानने के लिए इन बिंदुओं पर ध्यान दें। घटना का संबंध किस भाव से है, भाव का कारक
By: फ्यूचर समाचार
View:9666
प्रश्न: जातक को अपना घर कब प्राप्त होता है, ज्योतिषीय योग, दशा और गोचर को निम्न कुंडली पर प्रयोग करते हुए अपने नियमों को प्रतिपादित करें। जातक का घर स्वर्जित होगा या पैतृक यह भी स्पष्ट करें।
15-Feb-2016
View:20681
हर ग्रह के कारक घर, स्थायी घर, उच्च-नीच घर आदि निश्चित हैं। फिर भले ही वह ग्रह ‘अतिथि’ बने या किरायेदार! ग्रह का समय पूरा होने पर ग्रहरूपी दीया बुझ जाएगा। हर ग्रह उसकी अपनी राशि में, भले ही वह राशि अन्य ग्रह की कारक क्यों न हो, शुभ फल ही देगा।
15-Oct-2015
View:25545
प्रश्न: चक्र कितने प्रकार के होते हैं? सुदर्शन चक्र, नर चक्र, षन्नाड़ी चक्र आदि विभिन्न प्रकार के चक्रों का विवरण देते हुए उनके उपयोग सहित महत्व पर प्रकाश डालिए।